Wednesday, 31 August 2017

Monday, January 15, 2018

Website kaise bnaye

हलो नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं कि अपना खुद का वेबसाइट कैसे बनाये वो भी फ्री में और सिर्फ 5 मिनट में।जी हां दोस्तों आप अपना खुद का वेबसाइट बना सकते हैं वो भी सिर्फ 5 मिनट में इसके लिए आपको कुछ भी पैसे खर्च करने की ज़रूरत नही हैं लेकिन यदि आप अपने वेबसाइट को और भी अच्छा बनाना चाहते हैं तो आप कुछ पैसे खर्च कर सकते हैं।
गूगल हमें फ्री में वेबसाइट बनाने की सुविधा देता है जिससे हम बहुत आसानी से वेबसाइट बना सकते हैं।तो चलिए जानते हैं कि वेबसाइट कैसे बनाते हैं।
वेबसाइट बनाने से पहले आपको ये बात ध्यान रखना होगा कि आपको वेबसाइट बनाने के क्या क्या फायदा होगा कुछ कारण जिनकी वजह से आप वेबसाइट बना सकते हैं वो ये हो सकते हैं-
1)आप ऑनलाइन पैसा कमा सकते हो।
2)आप अपने पास जो भी जानकारी है उसे लोगो के साथ share करके लोगो की help कर सकते हो।
3) आप इंटरनेट पर अपना नाम को famous कर सकते हो।
4)यदि आपको लिखने का बहुत शौक हो तो  आप अपना लेखन से दुनिया को प्रभावित कर सकते हो 
5) आप अपने business को famous कर सकते हो।
6) आप अपनी वेबसाइट से पूरी दुनिया मे कुछ बात कह सकते हों वो भी आसानी से
तो इन सब फायदों को देखकर आपको इनमें से कोई ना कोई फायदा चाहिए होगा तो आप सोच रहे होंगे कि वेबसाइट कैसे बनाये तो चलिए जानते हैं कि वेबसाइट कैसे बनाते हैं-
वेबसाइट बनाने के लिए आपको एक smartphone या computer की ज़रूरत होगी और एक इंटरनेट connection की जो आपके पास है तो अब जानते हैं कि वेबसाइट कैसे बनाये

1) सबसे पहले google पर  Blogger.com open करे और अपनी gmail से sign in करे
इसके बाद आपको एक option दिखेगा create new blog जिस पर click करे
अब आपको कुछ option दिखेगा जिनमे Title होगा जहाँ आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट का नाम लिखे और नीचे address पर अपने ब्लॉग का link type करे
ओर कोई भी एक templete पर click करें
फिर create blog पर click kr de आपका blog /वेबसाइट  तैयार है जिस पर आप कुछ भी  डाल सकते है अब आपको अपने ब्लॉग को अपने अनुसार design कर सकते हैं यदि आपको कोई भी परेशानी हो तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपकी पूरी सहायता करेंगे ।

Wednesday, October 18, 2017

How to become ias officer in hindi IAS कैसे बने जाइये पूरी प्रक्रिया

        IAS  कैसे बने

नमस्कार दोस्तों आज हम बात भारत के एक प्रमुख   एग्जाम UPSE CSE  आईएएस के लिए होने वाली परीक्षा के बारे में बात करने वाले हैं।


आईएएस बनने के बाद कैंडिडेट निम्न पोस्ट पर जॉब करते हैं

1)  कलेक्टर
2)  कमिश्नर
3)  Head of public sector units
4)  चीफ सेक्रटरी
5)  कैबिनेट सेक्रेटरी

आईएएस की  जॉब बहुत चैलेंजिंग जॉब होती है इसके लिए बहुत कठिन  एग्जाम लिया जाता है क्युकी  एक IAS की बहुत बड़ी जिम्मदारी होती है ।
एक आईएएस अधिकारी का कैरियर बहुत ही मेहनती  व जिम्मेदार माना जाता है।
भारत में Govt. जॉब्स में सबसे बड़ी पोस्ट आईएएस को माना जाता है। यह  बहुत ही प्रतिष्ठित जॉब होती है। आईएएस का असली काम लाखो लोगों की ज़िंदगी में पॉजिटिव बदलाव लाना होता है।
आईएएस बनने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है और इसके लिए एग्जाम का प्रोसेस बहुत खतरनाक होता है ।

IAS के लिए एलिजिबिलिटी ―  

1) अभ्यर्थी के पास किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बैचलर की डिग्री होनी चाहिए।
2) General category के अभ्यर्थी की उम्र 21 से  32  साल तक होनी चाहिए तथा जनरल कैटेगरी का अभ्यर्थी 6 बार यह परीक्षा दे सकता है।
3) OBC category के अभ्यर्थी की उम्र  21 से 35
साल तक होनी चाहिए तथा ओबीसी कैटेगरी के अभ्यर्थी 9 बार यह परीक्षा दे सकते  है।
4) Sc /st category के अभ्यर्थी की उम्र 21 से 37 साल तक होनी चाहिए तथा ये अभ्यर्थी यह परीक्षा
37 साल तक कितनी भी बार दे सकते हैं।
5) इसके अलावा अभ्यर्थी को भारत का नागरिक होना भी जरूरी है।

IAS के एग्जाम को तीन बार में लिया जाता है ―

(1)  प्रीलिम्स  ―   यह एक आब्जेक्टिव टाइप पेपर     होता है इसमें करीब दस लाख स्टूडेंट्स पेपर देते हैं जिनमें से लगभग एक लाख स्टूडेंट्स मेन्स में सिलेक्ट होते हैं। इसमें जनरल नॉलेज, करंट अफेयर्स , हिस्ट्री, बेसिक नॉलेज , बेसिक कैलकुलेशन  आदि पर प्रश्न पूछे जाते हैं ।

इसमें दो पेपर होते हैं  100,100 नम्बर के जिनमें से      passing मार्क्स 33 33 लाने होते हैं इस पेपर के मार्क्स फाइनल टोटल में नहीं जुड़ते हैं।

(2) मेन्स ― प्रीलिम्स क्लियर करने के बाद   अभ्यर्थियों को मेन्स क्लियर करना पड़ता है इसमें 9 paper  होते हैं जो निम्न है  इनमें से सात पेपर के मार्क्स फाइनल टोटल में जुड़ते हैं और बाकी दो पेपर में पासिंग मार्क्स लाने पड़ते है ।

  पेपर  1)कोई एक भारतीय भाषा 250 marks
  पेपर  2) अंग्रेजी 250marks
  पेपर  3) निबंध 250 marks
  पेपर  4)सामान्य अध्ययन part 1  ( भारतीय                इतिहास, संस्कृति, और भूगोल )     250 marks
    पेपर  5)    सामान्य अध्ययन part 2 (गवर्नेंस            सामाजिक न्याय, संविधान , अंतरराष्ट्रीय सम्बन्ध )    250 marks
    पेपर  6)    सामान्य अध्ययन  part 3  ( प्रोद्योगिकी   आर्थिक विकास ,पर्यावरण , जैव विविधता ,आपदा प्रबंधन) 250 marks
   पेपर  7) सामान्य   अध्ययन part 4  (नैतिकता,ईमानदारी, ऐप्टिट्यूड )  250 marks
  पेपर  8)   वैकल्पिक विषय 250 marks
  पेपर  9)  वैकल्पिक विषय250 marks

 (3) इंटरव्यू ―   इसमें व्यक्ति से मौखिक रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं यह 275 मार्क्स का होता है। इसके मार्क्स टोटल में जुड़ते हैं। इसमें कैंडिडेट की पर्सनेलिटी को चैक किया जाता है ।

इन  सब परीक्षा के बाद IAS ऑफिसर का सिलेक्शन होता है लगभग हर वर्ष 1000  IAS ऑफिसर बनते हैं जिन्हें एक साल की ट्रेनिंग के लिए लाल बहादुर शास्त्री एकेडमी मसूरी भेजा जाता है जहां से वे आईएएस बन कर लौटते हैं और देश की सेवा करते हैं।
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नरेंद्र मोदी का जीवन संघर्ष चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक का सफर

NARENDRA MODI KI BIOGRAPHY HINDI



भारत की आज़ादी के तीन वर्ष बाद  17 सितम्बर 1950 को   गुजरात के एक छोटे से कस्बे, वड़नगर  में नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ । दामोदर दास मोदी और हीरा बा  की 6 संतानों में से मोदी उनकी तीसरी संतान थे ।


नरेन्द्र मोदी का बचपन ―

नरेन्द्र का  परिवार बहुत ग़रीब था और एक कच्चे मकान में रहता था । दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से मिलती थी । नरेंद्र मोदी की माँ आस-पड़ोस में बर्तन साफ करती थी ताकि अपने बच्चों का पालन पोषण कर सके । उनके पिता रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी सी दुकान  चलाते थे ।
मोदी बचपन में अपने पिता की चाय की दुकान में उनका हाथ बटाते थे। इन संघर्ष भरे दिनों का मोदी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।
चाय की दुकान संभालने के साथ साथ मोदी पढ़ाई लिखाई का भी पूरा ध्यान रखते थे  मोदी को पढ़ने का बहुत शौक रहा है  वे अक्सर अपने स्कूल के पुस्तकालय में घंटों बिता दिया करते थे ।
नरेंद्र को खेलों में भी बहुत दिलचस्पी थी।मोदी हिन्दू और मुस्लिम दोनों के त्यौहार बराबर उत्साह से मनाते थे।
बचपन से ही मोदी में देश भक्ति कूट-कूट कर भरी थी। 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान मोदी रेलवे स्टेशन पर जवानों से भरी ट्रेन में उनके लिए खाना और चाय लेकर जाते थे । 1965 में भारत पाक युद्ध के दौरान भी मोदी ने जवानों की खूब सेवा की।

जवानी के दिनों में हुआ परिवर्तन ―

युवावस्था में मोदी पर स्वामी विवेकानंद का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा । उन्होंने स्वामी जी के कार्यों का गहराई से अध्ययन किया जिसने उन्हें जीवन के रहस्यों की खोज की तरफ आकर्षित किया और उनमें त्याग और देश भक्ति की भावनाओं को नई उड़ान दी ।
उन्होंने स्वामी जी के भारत को विश्व गुरु बनाने के सपने को साकार करना अपने जीवन का मकसद बना लिया ।
17 साल की उम्र में मोदी ने घर छोड़ दिया और अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की  मोदी ने  हिमालय में ऋषीकेश, बंगाल में रामकृष्ण आश्रम और पूर्वोत्तर भारत की यात्रा की और फिर दो वर्ष बाद वे घर लौट आए।
इन यात्राओं से उन्हें स्वामी विवेकानंद को और गहराई से जानने का सौभाग्य मिला जिसने उन्हें पूरी तरह बदल दिया । जब वे घर पर लौटे तब उनका मकसद राष्ट्र की सेवा करना था और वे केवल दो सप्ताह ही घर पर रुके और फिर अहमदाबाद के लिए निकल पड़े।

आरएसएस में सदस्यता राजनीतिक जीवन की शुरुआत ―

अहमदाबाद में  वे  RSS के सदस्य बन गए  RSS एक ऐसा संगठन है जो देश  के सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक विकास के लिए कार्य करता है ।
1972 में मोदी  RSS के प्रचारक बन गए और अपना सारा समय RSS को देने लगे । वे सुबह पाँच बजे उठ जाते और देर रात तक काम करते । इस व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और राजनीति विज्ञान में डिग्री हासिल की प्रचारक होने के नाते मोदी ने गुजरात के विभिन्न हिस्सों में घुमन हुआ और लोगों की समस्याओं को करीब से समझा । 1975 में देश में जब आपातकाल  के काले बादल छाए थे, तब (R.S.S.) जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लग गया था । फिर भी मोदी देश की सेवा करते रहे और सरकार की गलत नीतियों का जमकर विरोध किया ।
और 2001 में  गुजरात में भयानक भूकंप आया और पूरे  गुजरात  में भारी विनाश हुआ  गुजरात सरकार के राहत कार्य से नाखुश होकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया ।

गुजरात में मुख्यमंत्री बनने के बाद का कार्यकाल ―

मोदी ने काफी कुशलता से अपना  कार्य संभाला और गुजरात को फिर से मज़बूत किया । मोदी ने गुजरात को भारत का सबसे बेहतरीन राज्य बना दिया । उन्होंने गाँव गाँव तक बिजली  पहुँचाई  देश में पहली बार किसी राज्य की सभी नदियों को जोड़ा गया जिससे पूरे राज्य में पानी की कमी दूर हुई।
एशिया के सबसे बड़े सोलर पार्क का निर्माण गुजरात  में किया  गुजरात के सभी गाँवों को इंटरनेट से जोड़ा गया और टूरिज़्म को भी बढ़ावा दिया गया
मोदी के कार्यकाल में गुजरात में बेरोज़गारी काफी कम हुई और महिलाओं की सुरक्षा में काफी मज़बूती आई  इन्ही कारणों की वजह से गुजरात की जनता ने मोदी को तीन बार लगातार अपना मुख्यमंत्री  नियुक्त किया
गुजरात में Modi की सफलता देखकर बीजेपी के बड़े नेताओं ने मोदी  को 2014  के  लोक सभा चुनावों का प्रधानमंत्री उम्मीदवार  बना दिया।
मोदी के गुजरात में विकासशील कार्य, उनके प्रेरणादायक भाषण  देश के प्रति उनका प्यार, उनकी साधारण शुरुआत और उनकी सकारात्मक सोच  के कारण उन्हें भारी मात्रा में वोट मिले और वे भारत के पंद्रहवे प्रधानमंत्री बने।

भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद  का कार्यकाल (अभी जारी है) ―

प्रधानमंत्री  बनने के बाद वे भारत का कुशलता से नेतृत्व कर रहे हैं और भारत को नई उचाईओं पर पहुँचा रहे हैं । उन्होंने कई विदेश यात्राएँ की और भारत की छवि संपूर्ण विश्व में मज़बूत की  इसी कारण विदेशों द्वारा भारत में काफी निवेश हुआ  मोदी ने पड़ोसी देशों से भी काफी अच्छे संबंध बनाए मोदी आतंकवाद और भृष्टाचार को रोकने के लिए 8 सितम्बर 2016 को पुराने 500 और 1000 के नोट रोक लगा दी और नए नोटो का चलन शुरू किया ।
मोदी ने जन धन योजना  स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया  जैसी  कई योजनाओं की शुरुआत की जिससे India में काफी विकास हो रहा है ।
मोदी  नेता होने के अलावा  एक कवि और लेखक भी हैं  वे अपने भाषणों से लाखों युवाओं का मनोबल बढ़ाते हैं और उनमें देश भक्ति की भावना जगाते हैं ।
नरेन्द्र मोदी एक जोशीले व्यक्ति है जिन्हें देख युवाओं में जोश भर जाता है।
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Friday, October 13, 2017

Paytm founder vijay shekhar sharma की biography hindi में

  Paytm founder  biography


नमस्कार दोस्तों आज मै आपको Paytm के फाउंडर   विजय शेखर शर्मा की सफलता की कहानी बताना चाहता हूँ क्योंकि मेरा विश्वास है की उनकी ये कहानी   आपको भी अपने जीवन में कुछ बड़ा कर गुजरने के लिए प्रेरित करेगी।

दोस्तों  कई बार लोग लगातार  मिल रही असफलताओं से घबरा जाते हैं, जिसकी वजह से भविष्य में मिलने वाली सफलताओं से भी हाथ धो बैठते हैं और फिर  किस्मत को दोष देते हैं पर आज हम उनके लिए एक आदर्श इंसान  विजय शेखर शर्मा की बात करने वाले हैं।
जोश, जूनून और साहस ये कुछ ऐसे शब्द हैं जिनसे Paytm के संस्थापक Mr. विजय शेखर शर्मा का व्यक्तित्व परिभाषित किया जा सकता है। Paytm जैसी कंपनी की स्थापना करना कोई आसान काम नहीं था  न जाने कितने विकट संघर्षो से गुजर कर इन्होंने Paytm नाम के सफलता के परचा  लहराया आईए जानते हैं-




विजय शेखर शर्मा का जन्म 8 जुलाई 1973 को एक  गरीब  परिवार से जन्मे  इनकी माता जी हाउसवाइफ थीं और पिता जी एक बेहद ईमानदार स्कूल टीचर थे, जो ट्यूशन पढ़ाने को भी अनैतिक मानते थे  भले ही विजय को अमीर घरों की सहूलियतें ना मिली हों पर निश्चित ही माता-पिता के संस्कार उन्हें विरासत में मिले थे।
विजय की प्रारम्भिक शिक्षा किसी महंगे  स्कूल में नहीं बल्कि विजयगढ़ के एक साधारण से हिंदी मीडियम स्कूल में हुई।  विजय हमेशा अपनी क्लास में फर्स्ट आते थे और अपनी मेधा के दम पर उन्होंने क्लास 12th की परीक्षा महज 14 वर्षों में ही उत्तीर्ण कर ली
आगे की पढाई के लिए अब अलीगढ से बाहर जाना था  विजय ने  '' Delhi College of Engineering''  में एडमिशन ले लिया एडमिशन  तो मिल गया लेकिन आगे की डगर आसान नहीं थी। शुरू से हिंदी माध्यम से पढाई करने के कारण इनकी English बहुत कमजोर थी और इस वजह से इन्हें college में बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्कूल का टॉपर रहे विजय Engineering के पेपर्स में बड़ी मुश्किल से पास हो पा रहे थे, और ये सब बस अंग्रेजी ना जानने के कारण हो रहा था। विजय हताश होने लगे वे कई बार घर वापस लौटने का विचार भी उनके मन में आया…पर वे टिके रहे… विजय ने ठान लिया कि वे पहले अंग्रेजी को काबू में करेंगे…
इसके बाद वे बाज़ार से पुरानी किताबें और मैगजींस उठा लाये और अपने दोस्तों की मदद से अंग्रेजी सीखने लगे। इसके लिए उन्होंने एक अनोखा तरीका भी अपनाया, वे एक ही किताब का हिंदी और इंग्लिश वर्जन खरीद लाते और parallely दोनों को पढ़ते।
इंसान की सबसे बड़ी सम्पत्ति उसकी इच्छा शक्ति होती है और विजय शेखर शर्मा की सबसे अहम सम्पत्ति उनकी इच्छाशक्ति है जिसके दम पर वह कुछ भी करने और कुछ भी कर दिखाने से पीछे नहीं हटे।अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने जल्द ही English पर अपनी पकड़ बना ली।

Engineering classes ना करने के कारण विजय के पास काफी समय रहता था, इस समय में विजय Yahoo के founder Sabeer Bhatiya से inspire होकर इन्टरनेट के क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहते थे।और Yahoo, Stanford College Campus में बनी थी, इसलिए वे वहां जाकर पढाई भी करना चाहते थे….लेकिन अपनी financial condition और lack of English knowledge की वजह से उनके लिए ये संभव न हो सका….पर एक चीज संभव थी…विजय Stanford के ही कुछ geniuses को फॉलो करते हुए खुद से coding सीख सकते थे।
और उन्होंने वही किया भी, उन्होंने किताबों से पढ़-पढ़ कर कोडिंग सीखी और खुद का एक content management system तैयार कर दिया, जिसे  आगे चल कर The Indian Express सहित किये सारे बड़े अखबार प्रयोग करने लगे।
इसके बाद इन्होंने college के 3rd year में अपने एक दोस्त के साथ मिलकर XS नाम की कंपनी  शुरू की  उनका यह बिजनेस बहुत से लोगों को पसंद आया  1999 में विजय शेखर ने XS को USA की Lotus Interworks को $ 5,00,000 में बेच दिया। और इसी कम्पनी में वे  काम करने लगे  लेकिन दूसरों की नौकरी करना शेखर शर्मा को पसंद नही था इसलिए  उन्होंने जल्द ही नौकरी छोड़ दी। लेकिन बिजनेस का स्वाद चख चुके शेखर भला खाली कैसे बैठते, उनका दिमाग तुरंत नए business ideas खोजने में लग गया।

नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने 2001 में One97 नाम की कंपनी शुरू की। इस कंपनी में शेखर ने अपनी सारी जमा पूंजी लगा डाली लेकिन यह कंपनी नहीं चली Business में असफलता  इंसान को आत्मीय और मानसिक रूप से तोड़ देता है। शेखर को भी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इस कठिन समय में इनके दोनों partners ने भी One97  छोड़ कर चले गए विजय नयी दिल्ली में कश्मीरी गेट के पास एक सस्ते से हॉस्टल में रहने लगे। एक वक्त तो ऐसा भी आया जब पैसा बचाने के लिए ये पैदल ही अपनी मंजिल का सफ़र तय करते थे तो कभी केवल दो कप चाय पर पूरा दिन गुजार देते थे।

लेकिन कहते है ना..
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती….

विजय जी की भी कोशिशें रंग लाने लगीं और GSM and CDMA mobile operators को innovative services provide करने वाली उनकी कम्पनी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी और मुनाफा कमाने लगी।

विजय शेखर शर्मा समय की नब्ज पकड़ने में माहिर हैं | बाजार में स्मार्टफोन बहुत तेजी से पॉपुलर हो रहे थे और यहीं से उनके दिमाग में cashless transaction का आइडिया आया।  उन्होंने One97 के बोर्ड के सामने payment ecosystem में इंटर करने का प्रपोजल रखा। लेकिन ये एक non-existent market था और कम्पनी पहले से अच्छी चल  रही थी इसलिए कोई भी ये रिस्क उठाने को तैयार नहीं हुआ।

ऐसे में विजय चाहते तो अपने आईडिया को लेकर अलग से एक कम्पनी शुरू कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनका कहना था कि –

"कोई और entrepreneur होता तो अपनी equity बेच कर खुद की एक कम्पनी शुरू कर देता। लेकिन मेरी इच्छा एक 100 साल पुरानी कम्पनी बनाने की है। मेरा मानना है कि men and boys इसलिए अलग हैं क्योंकि बॉयज एक झटके में कम्पनी बेच देते हैं। Men कंपनी चलाते हैं और विरासत का निर्माण करते हैं।"

विजय ने अपनी पर्सनल इक्विटी का 1%  अपने नए idea के लिए सामने रखा और 2001 में   paytm.com website  की स्थापना कर डाली  प्रारंभिक दौर में यह DTH recharge और prepaid mobile recharge के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही थी। फिर Paytm ने धीरे-धीरे अपनी services बढ़ानी शुरू की। पहले बिजली बिल, गैस का बिल payment की सुविधा दी और फिर Paytm ने अन्य e-commerce कंपनियों की तरह सामान बेचना शुरू कर दिया। और हाल में हुए note ban ने तो PayTM के लिए lottery का काम किया और देखते-देखते PayTM करोड़ों लोगों की ज़रुरत बना गया।

वर्तमान समय में Paytm भारत के सभी राज्यों में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज, data card रिचार्ज, पोस्टपेड मोबाइल रिचार्ज, बिल पेमेंट आदि की सेवाएँ प्रदान कर रहा है। आज Paytm भारत की सबसे लोकप्रिय online payment site है और इस का  कुल कारोबार 15,000 करोड़ रुपए के करीब पहुंच चुका है।

Economic Times ने विजय शेखर शर्मा को “India’s Hottest Business Leader under 40” के रूप में चुना है। विजय शेखर शर्मा हर उस भारतीय के लिए आदर्श है जो अपनी मेहनत से कुछ बनना चाहता है क्योकि यह उस इन्सान की कहानी है जिसने million dollar company का सपना तब देखा था जब उसकी जेब में खाना खाने के लिए 10 रूपये भी नहीं थे।


उसे करने में कोई मजा नहीं है जो दूसरे आपसे करने को कहें, असली मजा उसे करने में है जो लोग कहें कि तुम नही कर सकते हो।



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Thursday, October 12, 2017

Apj अब्दुल कलाम biography

APJAbdulkalam biography



"सपने वो नहीं होते जो आप सोने के बाद देखते है
सपने तो हो होते है जो आपको सोने ही नही देते है।"


ऐसा कहना है भारत रत्न APJ अब्दुल कलाम का जिन्होंने अंतरिक्ष और रक्षा विभाग में भारत को इतना बड़ा योगदान दिया है जिससे शब्दों में बता नही सकते है। APJ अब्दुल कलाम भारत के 11 वे राष्टपति (2002-2007) बने उन्हें यह पद देेेश को  मिसाइल के क्षेत्र में विशेष योगदान के कारण मिला ।APJ अब्दुल कलाम को यह कामयाबी इतनी आसानी से नही मिली थी। इस  कामयाबी के पीछे उनका बहुत बड़ा संघर्ष छुपा हुआ था ।

APJ अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 मे तमिलनाडु के रामेश्वरम् के निकट धनुष्कोडी गाँव मे हुआ था।
शुरू से ही उनके परिवार की आर्थिक स्थित ख़राब रही थी । APJ अब्दुल कलाम को छोटी उम्र में ही काम कारण पड़ा वे सुबह अख़बार और मैगजीन बेचने का काम किया करता था इतना मेहनत  करने के बाद भी  वे अपनी पढ़ाई में ध्यान रखते थे।
1954 में तिरुचापल्ली के सेन्टचोसप कॉलेज से भौतिक विज्ञान से स्नातक (ग्रेजवेशन ) किया और आगे पढना चाहते थे इसलिए वह आगे की पढाई के लिए 1955 में मद्रास आ गए और MADRAS INSTITUTE OF TECHNOLOGY  से अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई की।
1969 में भारतीय अनुसंधान संगठन (ISRO) में डायरेक्ट के रूप में चुने गए तथा भारत को सैटेलाइट परियोजना में सफलता दिलाई और उसके बाद भारत को एक से बढ़कर एक मिसाइले दी और पूरी दुनिया को बता दिया की हम भारतीय किसी से कम नही।
2007 के बाद उम्र अधिक होने पर उन्होंने प्रोफेसर के रूप में काम करना पसंद किया और पूरा समय नवयुगो के मार्गदर्शन में लगा दिया ।

27 जुलाई 2015 की शाम अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में “Creating A Livable Planet Earth” पर एक व्याख्यान देते हुए उनकी दिल के दौरे के कारण मौत हो गयी।  30 जुलाई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति को पूरे सम्मान के साथ रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में दफ़ना दिया गया।

दोस्तों APJ अब्दुल कलाम का कहना है की
'' जीवन में कठिनाई हमें बर्बाद करने नही आती है
बल्कि ये हमारी छुपी हुई सामर्थय और शक्तियो को बाहर निकालने में हमारी मदद करती है ''

Tuesday, October 10, 2017

Adidas and puma biography in hindi

दोस्तों आपने PUMA और ADIDAS दोनों का नाम तो सुना ही होगा जी हाँ वही जूते बनाने वाली कम्पनी पर क्या आप जानते हैं कि इन कम्पनी के मालिक कौन है शायद नही तो आज हम उन्ही के बारे में बात करने वाले हैं।



नमस्कार दोस्तों  
इस पोस्ट में आपको पता चलेगा की कैसे एक जूते सिलने वाले  के बेटों ने दुनिया में FAMOUS कंपनी बना दी ?

ADIDAS और puma कम्पनी की स्थापना जर्मनी के ADOLF DASS और RUDILF DASSLER ने की थी
करीब सवा सौ साल पहले जर्मनी के छोटे से कस्बे हरजोजेनोर्च में एक जूते की फैक्टरी में क्रिस्टन डेसलर नाम का व्यक्ति जूतों की सिलाई करता था। उसकी पत्नी पाओलिन वहीं एक छोटी-सी लॉन्ड्री चलाती थीं। इस दंपती के दो बेटे थे- एडोल्फ और रूडोल्फ जिन्हें प्यार से एडी और रूडी बुलाया जाता था  दोनों भाई अच्छे खिलाड़ी थे। 
पिता द्वारा बनाए स्पोर्ट्स जूतों की फिटिंग से  ADI और RUDI कभी खुश नहीं हुए। वे सोचते  थे कि ऐसे जूते  पहनकर कोई खिलाड़ी मैदान में कैसे अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। 
कम उम्र में एडोल्फ और रूडी ने अपने पिता की फैक्टरी में काम करना शुरू कर दिया 
Adi ने अपने  अपने अंदाज़ से  जूते बनाये जो  एडी को अत्यंत सुविधाजनक लगे तो वह अपने मित्रों के लिए भी जूते  बनाने लगा जिन्हें खूब पसंद किया गया।   उसी समय  पहला विश्वयुद्ध शुरू हो गया। एडोल्फ  और रूडी ने जर्मनी की ओर से लड़ाई लड़ी। पहले विश्वयुद्ध से लौटने के बाद उन्होंने अपनी मां की लॉन्ड्री में स्पोर्ट्स शूज बनाना शुरू कर दिया। बतौर सैनिक हार का सामना कर चुके एडोल्फ कुछ ऐसा करना चाहते थे कि हार के कलंक को मिटा सकें।  और अपने बनाए शूज की लोकप्रियता को देखते हुए एडी ने भाई रूडी के साथ स्पोर्ट्स शूज बनाने का कारखाना लगाने का निर्णय तो कर लिया  लेकिन पैसे नहीं होने के कारण  दोनों भाइयों ने मां की लॉन्ड्री को अपना वर्कशॉप बना लिया । यहां बिजली नहीं मिलने पर वे स्टेशनरी साइकिल के पेडल पावर से बिजली पैदा करते थे। इस तरह जब एडी और रूडी ने थोड़ा पैसा कमाया तो  जुलाई 1924 में उन्होंने डासलर ब्रदर्स नाम से एक कंपनी बना ली।
3 साल बाद दोने भाई झगडे के कारण अलग हो गए और ADOLFDASS ने अपने नाम पर ही adidas कंपनी बनाई  RUDILF DASSLER ने puma कंपनी बनाई ।
1936 में बर्लिन में समर ओलिंपिक के समय ADI ने अमेरिकी एथलीट "जेसी ओवेन्स" के लिए शूज और अन्य सामान बनाया। जेसी ने एडिडास के जूते पहनकर 100 मीटर ,200 मीटर और 400 मीटर की रिले रेस में गोल्ड मेडल जीता और लॉन्ग जंप में भी गोल्ड पर कब्जा जमाया। जेसी के इस प्रदर्शन ने एडी के जूतों को मशहूर कर दिया। 
 RUDILF DASSLER ने puma कम्पनी बनायीं जो अपने सामानों की वजह से लोगो पहली पसंद  बन गयी 
पहले तो दोनो कम्पनीया जूते ही बनाती थी लेकिन बाद में घडी,  टी-शर्ट ,बैग  और खेल सम्बन्धित सभी प्रकार के सामान बनाने लग गयी ।
तो दोस्तों देखा आपने की कैसे अपनी मेहनत और लगन के बल पर दो भाइयो ने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना खुद उन्होंने भी नही की थी।
          " अगर इरादे पक्के हो तो 
         दुनिया में कुछ भी पाना असंभव नही ।"
तो दोस्तों कैसा लगा आपको यह article।, comment करके जरूर बताईयेगा और अगर आपके पास 20 सेकंड है तो ये किसी के साथ  शेयर भी कर दीजियेगा हो सकता है ये किसी की जिंदगी बदल दे।

अगर आपको किसी भी topic पर article चाहिए तो आप हमें comment करके बता सकते हैं या अगर आपका कोई भी सवाल हो तो comment कर सकते हैं।
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धन्यवाद।
          

Vicky roy biography in hindi

नमस्कार दोस्तों
Sacchagyan.com पर आपका स्वागत है आज हम आपके साथ एक ऐसे शख्स की कहानी शेयर करने जा रहे है जो बचपन में घर से भाग जाता है और फिर स्टेशन पर कूड़ा बीनने का काम करता है लेकिन अपनी लगन के कारण एक दिन वो सब पा लेता है जिसके सपने उसने खुद भी  नही  देखे होगे   ।




इस इंसान का नाम है  ―vicky roy जिसका नाम शायद आपने पहली बार सुना हो लेकिन इसके जीवन की कहानी सभी के लिए प्रेरणा का काम करेगी।

Vicky  एक गरीब परिवार से  थे उसके अलावा  उसकी तीन बहने और भाई थे अपनी मां से पीटा जाना उनके लिए सामान्य था रॉय को घुमने फिरने का बहुत शोक था लेकिन उसे बचपन से ही अन्य बच्चों के साथ खेलने की अनुमति नहीं थी और जब उसके माता-पिता काम की तलाश में चले गए  तो उसे उसके नाना नानी के साथ छोड़ दिया गया।
1999 में, जब वह 11 वर्ष के थे तब रॉय ने घर से  भागने का फैसला किया।  उन्होंने अपने चाचा की जेब से 900 रूपये चुराए  और घर से भागकर दिल्ली आ गए । स्टेशन पर कुछ बच्चों ने उसे रोते हुए देखा, और उन्हें सलाम बलाक ट्रस्ट में ले गये , जो कि मीरा नायर की फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ की कमाई से बना था।
लेकिन ट्रस्ट हमेशा अंदर से बंद रहता था . और  कमरे में बंद रहना रॉय को बिलकुल भी पसंद नहीं था  इसलिए एक सुबह जब दूधवाले के लिए दरवाजे खोले गये  तो वह दूसरी बार भाग गए  वह रेलवे स्टेशन पर उन बच्चों से मिले जो रॉय को ट्रस्ट लेकर गए थे  और उन्हें अपनी कहानी बताई इसके बाद  उन्होंने बाकि बच्चो  के साथ कूड़ा उठाने का काम शुरू कर दिया । वे  पानी की बोतलें इकठ्ठा करते उसमे ठंडा पानी भरते और ट्रेन में जाकर बेच देते । ये सभी पैसे उन्हें अपने मालिक को देने होते थे जो बदले में उन्हें खाना देता लेकिन कुछ समय बाद रॉय  को लगा की इससे वह नहीं कमा सकते  इसलिए ये काम छोड़कर वे अजमेरी गेट के पास एक होटल  में बर्तन धोने का काम करने लगे । विक्की  के अनुसार वह समय उसकी जिन्दगी सबसे कठिन समय था क्योकि उस समय सर्दी थी सर्दियों के दौरान पानी ठंडा रहता था जिससे उनके हाथ पैरो पर कई जख्म हो जाते थे । उन्हें अफ़सोस होता था की वह अपनी घर से क्यों  भाग कर दिल्ली आ गया  लेकिन एक दिन रॉय  की मुलाकात सलाम बलाक ट्रस्ट के एक स्वयंसेवक से हुई  जिसने उन्हें बताया कि उन्हें अभी स्कूल में होना चाहिए  साथ ही स्वयंसेवक ने बताया की उनके ट्रस्ट के कई केंद्र हैं और कुछ में आप स्कूल जा सकते हैं और साथ ही आप हर समय बंद नहीं रहोगे ।  वह इनमे से एक  केंद्र  में शामिल हो गए, जिसका नाम "अपना घर" था ।
विक्की रॉय/ vicky roy  को स्कूल में 6th क्लास में दाखिला दिया गया  रॉय ने 10 वीं बोर्ड की परीक्षा में 48 फीसदी प्राप्त किये । स्कूल के अध्यापक को एहसास हुआ कि वह पढाई में उतने अच्छे नहीं है, इसलिए उन्हें National Institute of Open Schooling में शामिल होने के लिए कहा गया  जहां वह कंप्यूटर या टीवी रिपेयर करने का  प्रशिक्षण ले सकता था। फोटोग्राफी के साथ उनका मन यही से आया जब ट्रस्ट के दो बच्चे फोटोग्राफी में प्रशिक्षण के बाद इंडोनेशिया और श्रीलंका गए । यह देखकर विक्की रॉय के मन में भी लालच आ गया और उसने अपने अध्यापक को कहा की वह भी फोटोग्राफी सीखना चाहते है
रॉय को पता भी नहीं था कि यह कहकर उसका जीवन हमेशा के लिए बदलने वाला है  उस समय एक ब्रिटिश फिल्म निर्माता डिक्सी बेंजामिन ट्रस्ट में documentary बनाने आये थे तभी अध्यापक ने रॉय की मुलाकात बेंजामिन से करवाई । इस तरह विक्की रॉय बेंजामिन के सहायक बन गए  और एक फोटोग्राफर के रूप में अपनी यात्रा शुरू की रॉय को उस समय इंग्लिश नहीं आती थी इसलिए वह बेंजामिनकी बातों में हाँ में हाँ मिलाता था । 
रॉय जल्द ही 18 साल के होने वाले थे  और इसका मतलब था कि उन्हें सलाम बलाक ट्रस्ट छोड़ना होगा क्योकि उसमे केवल 18 साल से छोटे बच्चे ही रह सकते थे बाकी का रहना अब अपने बलबूते पर ही करना होगा। ट्रस्ट केवल एक गैस सिलेंडर, स्टोव, मैट्रेस और बर्तन जैसी मूलभूत चीजे प्रदान करेगा लेकिन वह ट्रस्ट के आलावा किसी ओर को नहीं जानता था। हालांकि स्वतंत्र रहना रॉय के लिए  एक आशीर्वाद साबित हुआ क्योकि रॉय ने असिस्टेंट बनने लिए  प्रसिद्ध फोटोग्राफर अनय मान से संपर्क किया  उन्होंने सहमति व्यक्त की, लेकिन एक शर्त रखी की रॉय को कम से कम तीन साल तक उसके साथ काम करना होगा
अनयमान एक अच्छे शिक्षक साबित हुए उन्होंने रॉय को फोटोग्राफी सिखाने के लिए  ड्राइंग का इस्तेमाल किया और प्रकाश तथा क्षेत्र की गहराई जैसे concepts से रूबरू करवाया । यह कार्य रॉय को कई जगहों पर ले गया अब कई बार  उनका जीवन  शानदार होटल में बीतता था ।
साल  2007 में उसने  ‘स्ट्रीट ड्रीम्स’ नाम की प्रदर्शनी लगायी जिसमे यह दिखाया की वह सडको पर कैसे रहता था और कैसे कबाड़ उठाता था । यह ब्रिटिश कमीशन और डीएफआईडी द्वारा प्रायोजित की गई थी  जो बहुत सफल रही। रॉय ने लंदन और दक्षिण अफ्रीका में भी exhibition किया जो काफी सफल रहा । 
  ‘स्ट्रीट ड्रीम्स’ की सफलता के बाद रॉय नई exhibitions  को लेकर आश्वस्त था।
 साल 2008 में  मेबा फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक वैश्विक प्रतियोगिता में भाग लिया जिसमे 5000 लोग ने हिस्सा लिया था   इसमें जितने वाले को अमेरिका जाकर छह महीने के लिए  विश्व व्यापार केंद्र (W.U.T.C)  की फोटोग्राफ़ी  करने का मोका दिया जाना था तथा  रॉय जीतने वाले तीन फोटोग्राफरों में से एक था। । उन्हें ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग अवार्ड से नवाज़ा गया  रॉय को बकिंघम पैलेस में प्रिंस एडवर्ड के साथ दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया गया। यह पहली बार था जब उसने महल के बारे में सुना था। रॉय का काम कई जगहों पर जाना शुरू हुआ जैसे व्हाइटचापल गैलरी और फ़ोटोमुस्म स्विटज़रलैंड.
2011 में विक्की रॉय ने अपने दोस्त चन्दन गोम्स के साथ एक लाइब्रेरी खोली इसमें फोटोग्राफी की किताबें रखी गई फोटोग्राफी  की किताबे काफी महंगी आती थी जिसे एक साधारण बच्चा नहीं खरीद सकता था.  उन्होंने सभी बड़े फोटोग्राफर को एक मेल किया और अपना उद्देश्य बताया और कहा की वे उनसे उनकी एक एक किताब लाइब्रेरी की लिए फ्री में लेना चाहते है ताकि गरीब बच्चो को फायदा हो सके. इस तरह उन्होंने करीब काफी सारी किताबे इकट्ठी की।
यह लाइब्रेरी गरीब  बच्चों के लिए फोटोग्राफी  का आयोजन करता है. यह लाइब्रेरी  वर्तमान में दिल्ली के मेहरौली में ओजस आर्ट गैलरी में स्थित है।

दोस्तों यह एक कूड़ा उठाने वाले की कहानी है जो अपनी मेहनत के दम पर आज भारत के बड़े बड़े फोटोग्राफर की लिस्ट में शामिल है. किसी ने सही ही कहा है की परिश्रम  वह चाबी है जो किस्मत के दरवाज़े खोलती है हम में से कई लोग अपनी जिन्दगी को  हालातो का रोना रोते हुए बिता देते है तो कई  लोग हालातो को झुकाने के लिए मजबूर कर देते है तो
   यदि आपको अपनी जिंदगी में कुछ करना है  तो अब आपको हालातों से लड़कर मेहनत करनी    होगी ।

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