रंगो द्वारा व्यक्तित्व की पहचान ….

मानव जीवन में जिस प्रकार  व्यक्तित्व का प्रभाव पड़ता है,उसी प्रकार  व्यक्तित्व पर रंगो का प्रभाव पड़ता है ,अत: जीवन में रंग भी अपना अलग महत्व रखते हैं। ईश्वर द्वारा रची यह प्रकृति भी बड़ी विचित्र है, जिसके अंदर बहुत सारे  रंगो का समावेश हुआ है ,जो कई रंगो से रंगी है ,वो रंग जो खुशियां ,शांति ,हरियाली , दु:ख, आदि के प्रतीक हैं ।

आज का युग  वैज्ञानिक युग है,जिसमें हर बात जब तक सच की कसौटी पर खरी नही उतरती तब तक वह स्वीकार नहीं की जाती है , इसलिए  विभिन्न प्रकार के परीक्षण और प्रयोग किये बिना किसी वस्तु की सत्यता को कबूल नहींं किया जा सकता है ।रंगो पर भी वैज्ञानिकों ने कई परिक्षण किये ,जिनके आधार पर उन्होंने इसके प्रभावों के बारे में बताया है । वैज्ञानिकों ने विभिन्न प्रकाशीय तरंगो पर परीक्षण किया है और परीक्षण के आधार पर पाया है विभिन्न प्रकार के रोगों के प्रकाश का भिन्न -भिन्न महत्व है।

लाल रंग –

लाल रंग पसंद करने वाला व्यक्ति सफलता प्राप्ति में  विश्वास करते हैं तथा ऐसे  व्यक्तियों का स्वभाव संघर्षो से जूझना , जोखिमों को निमंत्रण देना ,क्रांति संचालन करना ,चुनौतियों का सामना करना व उत्साह और पूर्ण आत्मविश्वास से परिपूर्ण  होते हैं ऐसे  व्यक्ति अपने विषय में खुद निर्णय लेते हैं तथा हर तरह की बाधाएं खुद दूर करने की इच्छा रखते हैं 

हरा रंग –

हरे रंग को पसंद करने वाले व्यक्ति गैस्ट्रिक अल्सर तथा पाचन संबंधी रोगों से प्रभावित होते हैं .हरा रंग पसंद करने वाला व्यक्ति अपने गुणों द्वारा दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है .वह अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहता है .इसके लिए वह विरोध व प्रतिरोध के बावजूद भी  प्रयत्नशील रहते है .

पीला रंग –

पीला रंग आकांक्षाओं की पूर्ति हेतु किये गये श्रम का संकेत करता है . जहां हरे रंग में  समृद्धि है ,वही पीले रंग में  विश्राम(आराम ) है. इस रंग की  भावनात्मक संतुष्टि चंचल व संवेगी आशाओं में समाहित है . जो व्यक्ति इस रंग को अत्याधिक पसंद करते हैं वे अपने  लक्ष्य प्रप्ति के लिए पूर्ण  प्रयत्नशील रहते हैं ऐसा व्यक्ति स्वतंत्रता प्राप्ति के रास्तोंं की खोज में लगा रहता है ,तथा दूसरों से सम्बन्ध सुधारने की इच्छा में लगा रहता है 

नीला रंग-

नीला रंग समुद्र तथा आसमान के समान जिसका प्रभाव शांत स्थिर जल के समान है इसकी स्थिति त्वचा पर मानी गई है .चर्म रोगों का सम्बन्ध को इस रंग से जोड़ा जाता है . गहरा नीला रंग शक्ति का प्रतीक है इस रंग को अपने जीवन में प्राथमिकता देने वाले व्यक्ति चतुर और मीठी वाणी से ओत प्रोत होते है .

बैंगनी रंग –

लाल और नीले रंग को मिलाकर ही बैंगनी रंग का अविष्कार हुआ है. जिन व्यक्तियों में भावना की कमी होती है वह व्यक्ति ही इस रंग को अधिक पसंद करते हैं एक रिसर्च से पता चला कि गर्भावस्था में  स्त्रियां शारीरिक व मानसिक परिवर्तन के दौरान बैंगनी रंग के प्रति विशेष लगाव महसूस करती हैं ऐसा रंग पसंद करने वाला व्यक्ति खुद को अपने कार्य कलापों से प्रसन्न होता है .यदि कोई व्यक्ति प्रथम स्थान पर इस रंग को पसंद करता है तो वह निश्चित रूप सेअसमान्य स्थिति

भूरा रंग –

रक्त विकार , अस्वस्थता का घोतक है .सामाजिक असुरक्षा व  विस्थापित मनोकृति को प्रकट करता है .जिन लोगों के पास दो पल आराम करने के लिए सिर पर छत नहीं होती अक्सर भूरा रंग ही पसंद करते हैं,तथा बात की ओर संकेत करता है कि व्यक्ति शारीरिक आराम व कामवासना की पूर्ति की इच्छा रखता है इस रंग का अधिक पसंद करना शारीरिक रोग की ओर भी संकेत करता है.

सलेटी रंग –

यह रंग दो विपरीत स्थितियों के बीच शांति या माध्यम का सूचक है .ना यह तनाव की ओर संकेत करता है ना विश्राम का घोतक है . इस रंग को अपने   व्यक्तित्व में पहला स्थान देने वाला व्यक्ति हृदय के भावों को छुपाने की कला में माहिर होता है.

काला रंग –

अपने आप में संपूर्ण प्रकाश समेटे यह रंग रंगो की सत्ता को नकारता गहराई व्यक्त करता है.(यदि इस रंग का चुनाव पहले तीन स्थानों पर करता है ,तो गहन क्षति का संकेत है) यह रंग पसंद करने वाला व्यक्ति वर्तमान स्थिति के तीव्र विनाश व संपूर्ण परिवर्तन का संकेत है .इस रंग का चुनाव अंतिम दो अवस्थाओं में ही होना चाहिए.

हम अपने जीवन में रंगो की विभिन्न प्रकाशों की उपयोगिता को नकार नहीं सकते हैं।

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