कैंची धाम ,चमत्कारों का अनोखा संगम .

उत्तरखंड में स्थित कैंची धाम हनुमान मंदिर, आज किस्मत बनाने वाले करौली बाबा के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध है . कैची धाम नीम करौली बाबा की तपोस्थली पर श्रद्धा भाव से की गई पूजा कभी भी व्यर्थ नही जाती .

नीम करौली बाबा का कैंंची धाम आश्रम नैनीतल से 20 किलोमीटर दूर नैनीताल – अलमोड़ा रोड़ पर समुद्र तल से 1400 मीटर ऊंचाई पर स्थित है .
बाबा 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णनंद जी के साथ मिलकर यहांं आश्रम बनाने का विचार किया था.
बाबा नीम करौली ने इस स्थान पर 1964 में आश्रम बनाया था. इन्हीं बाबा नीम करौली को हनुमान जी का धरती पर दूसरा रुप कहा जाता है. वैसे बाबा का असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था . अपनी स्थापना के बाद से अब तक भव्य मंदिर का रूप ले चुके कैंची धाम में ‘ मां दुर्गा ,  वैष्णो देवी ,हनुमान जी और राधा कृष्ण की मूर्तियां हैं .

कैंची धाम में मुख्य दर्शन –

 मंदिर में आज बाबा की निजी वस्तुएं ,गद्दी , कंबल , छडी़ आज भी वैसी ही सुरक्षित हैंं जैसी उनकी जीवन में थी .पर्यटकों के लिए आज वही मुख्य दर्शन का केंद्र हैं .
‘ मार्गशीर्ष की अष्टमी तिथि के दिन बाबा नीम करौली के भक्त उनका जन्मोत्सव मनाते हैं ‘
 ऋषि-मुनियों की आराधना व तपस्थली के रुप में प्रसिद्ध इस पावन भूमि के पग – पग पर देवालयों की भरमार है .
सुंदर निर्झर झरने कल – कल धुन में नित्य करती नदियां पर्यटकों व श्रद्धालुओं को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं .

चमत्कार – 

एक चमत्कार के अनुसार बाबा नीम करौली महाराज ने गर्मी की तपती धूप में एक भक्त को बादल की छतरी बनवाकर उसे उसकी मंजिल तक पंहुचवाया .
एक अन्य चमत्कार के अनुसार एक बार यहां आयोजित भंडारे में ‘ घी ‘ की कमी पड़ गई थी .बाबा के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया. उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो , वह जल घी में परिवर्तित हो गया .
इस तरह एक नही अनेक किवंदतिया जुडी़ हुई हैं .
हालांंकि वह आडंबरो से दूर रहते थे ,ना तो उनके माथे पर तिलक होता था और ना ही गले में कंठी माला ,एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपना पैर किसी को नही छूने देते थे यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे .

बाबा के विदेशी भक्त – 

हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबट्स भी बाबा की परम भक्त बताई जाती है, फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भी यह आ चुके हैं .
कैंची धाम यात्रा एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने भी की थी और बाबा के दिए सेब को उन्होंने एप्पल को कंपनी का लोगो बना दिया .

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