कैसे पड़ा भारतीया मुद्रा का नाम रुपया ..

आज के दौर में रुपया इंसान की पहली जरुरत माना जाता है . आज रुपये के बिना जीवन संभव नहीं है . लेकिन किया कभी आपने सोचा है कि आखिर इसका प्रचलन कब और किसने शुरू किया ,नही तो हम आपको विस्तार से बताते हैं .

1540- 1545 का दौर – 

रुपया शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम शेर शाह सूरी ने भारत में अपने शासन काल (1540-1545) के दौर में किया था . शेर शाह सूरी एक बुद्धिमान और चतुर राजा था . शेर शाह सूरी ने अपने शासन काल में चलाया वह चाँदी के सिक्के के रूप में था . जिसका वजन 11.534 ग्राम के लगभग था . इसके अलावा सेर शाह सूरी ने तांबे का सिक्का जिसे ” दाम ” तथा सोने का सिक्का जिसको ” मोहर ” कहा जाता था . शेर शाह सूरी ने के शासन के दौरान पूरे उपमहाद्वीप में मौद्रिक प्रणाली को सुद्रढ़ करने के लिए तीनों धातुओं के सिक्कों का मानकीकरण किया था .

भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का उदय – 

शेर शाह सूरी के शासन काल के दौरान आरम्भ किया गया ” रुपया ” नाम आज तकप्रचलन में है .भारत में ब्रिटिश राज के दौरान भी वह प्रचलन में रहा , इस दौरान इसके भार में कुछ गिरावट हुई . अब इस सिक्के का भार 11.66 ग्राम था और इसमेंं 91.7% शुद्ध चांदी थी . 19 वी शताब्दी के अंत में रुपया ब्रिटिश विनिमय दर के अनुसार एक ” शिलिंग ” और चार पेंस.के बराबर था . वही यह एक पाउंड स्टर्लिग का 1/15 भाग था .
19 वी सदी में जब दुनिया में सबसे सशक्त अर्थव्यवस्थाएं स्वर्ण मानक पर आधारित थी .

प्राचुर मात्रा में चाँदी का मिलना – 

19 वी शताब्दी में इसके विपरीत परिणाम हुए . जब यूरोप और अमेरिका में भारी पैमाने पर चाँदी की खोज हुई . उस समय की मजबूत अर्थव्यवस्थाएं सोने पर आधारित थी . चाँदी की खोज से , चाँदी और सोने के सापेक्षित मूल्यों में भारी अंतर आया . अचानक ही भारत की मुद्रा विश्व बाजार में उतना नही खरीद सकती थी जितना पहले . इसे  ” रुपये की गिरावट के नाम से जाना जाता है .  पहले रुपया ( 11.66) 16 आने या 64 पैसे या 192 पाई में बाँटा जाता था . रुपये का दशमलीकरण 1957 में हुआ , 1869 में सीलोन ( श्री लंका ) में और 1961 में पाकिस्तान में हुआ . इस प्रकार भारतीय रुपया 100 पैसों में विभाजित हो गया . भारत में पैसे को पहले नया पैसा नाम से जाना जाता था .

मुद्रा के अलग – अलग नाम –

भारत में मुद्रा को रुपया कहा जाता है ,बहुत पहले भारत में मुद्रा को अलग – अलग नामों से पुकारा जाता था . कही ” मुहर ” कही ” दाम ” कही ” टका ” तो कही ” आना ” . हर क्षेत्र में मुद्रा की अलग पहचान थी . बाद में रुपया बन गई . रुपये के रुप तो बदलते रहे पंरतु इसका नाम आज तक नही बदला .

कागज के नोटों की शुरुआत – 

रुपयों को कागज के नोटों में सबसे पहले जारी करने वालों में थे बैंक ऑफ हिंदुस्तान ( 1770 ) , द जनरल बैंक ऑफ बंगाल एंड बिहार( 1773 -75 ) ,वारेन हेस्टिंग्स द्वारा स्थापित और द बंगाल बैंक ( 1784 -91) .

शुरुआत में बैंक ऑफ बंगाल द्वारा जारी किए गए कागज के नोटों को केवल एक ही तरफ छपा जाता था .

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