भारत देश के बड़े दंगे ,जिससे हिल गई इंसानियत की नीव .

दंगा ,एक ऐसा शब्द जिसे सुन कर ही मन में भय का एक आजीब वातावरण पैदा हो जाता है. ना जाने कब किसको अपना घर परिवार छोड़ना पड़े ,कब किसकी हत्या हो जाए ना जाने किसका बेटा या बाप दंगे की भेट चढ़ जाए .जिसका गम सालों साल नही जाता .

हर दंगा देश और देशवासियों को एक ना भूल पाने का गम देकर जाता है.

जिसमें अक्सर राजनेता अपना उद्देश्य सीधा करते हैं हमको और आपको चाहिए कि इन नेताओं की भड़काने वाली भाषा के वहकावे में ना आए .

भारतीय इतिहास में ऐसे ही ना भूल पाने वाले दंगे .

                              प्रतीकात्मक चित्र

कोलकाता दंगा 1946 –

1946 में हुए इस दंगे में 72 घंटों के भीतर ही लगभग 6 हजार से अधिक लोग मारे गए तथा 2 हजार से अधिक घायल हो गए थे .तथा 1 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए. इसे ग्रेट कलकत्ता किलिंग भी कहा जाता है .
हिंदुस्तान की धड़कनों को पहचानने वाले महात्मा गांधी आने वाले समय की भंयकरता समझ रहे थे . महात्मा गांधी ने अखिरी वाइसराय माउंट बेटन से अपनी दूसरी मुलाकात में साफ – साफ कह दिया. अंग्रेजी तंत्र की ‘ फूट डालो और राज करो ‘ की नीति ने यह स्थिति बना दी है अब सिर्फ दो ही विकल्प बचे हैं कि या तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंग्रेजी शासन ही चलता रहे या फिर भारत रक्त स्नान करे .

                               प्रतीकात्मक चित्र

गुजरात दंगा 1969 –

सितम्बर- अक्टूबर 1969 में यह गुजरात का सबसे बड़ा दंगा था. इसमें लगभग 700 लोग मारे गए थे. इसके अलावा 1100 लोग घायल हुए तथा लगभग 48000 दुकानों और घरों मे लूटपाट की गई थी .

इंदिरा गांधी की हत्या – सिंख विरोधी दंगा 1984 –

1984 के यह दंगे इंदिरा गांधी की हत्या के बाद शुरु हुए थे .जो सिखों के खिलाफ थे .इन दंगों में 3000 से अधिक लोगों की मौत हुई तथा बड़े स्तर पर लूटपाट की गई.

कश्मीर दंगा 1986- 

1986 में कश्मीर दंगा कश्मीरी पंडितों के खिलाफ था .जिसमें लगभग 1000 कश्मीरी पंडितों की मौत हुई और कई हजार कश्मीरी पंडित बेघर हो गए.

भागलपुर दंगा 1989-

यह दंगा लगभग दो महीने तक होता रहा ,जिसमें भागलपुर के आस-पास के 250 गांव दंगे में झुलसते रहे.
सरकारी आंकडा 1000 मौतों का है लेकिन इसमेंं सच्चाई नही है संख्या इससे कही अधिक है .

                           प्रतीकात्मक चित्र

मुंबई दंगा 1992 –

मुंबई दंगों की मुख्य वजह बाबरी मस्जिद कि गिराया जाना था. 1992 में मुंबई में लगभग 150,000 लोगों की एक रैली ,हिंसक रैली में बदल गई और पूरी मुंबई में दंगे शुरू हो गए .जिसमें लगभग 2000 लोग मारे गये .
                               प्रतीकात्मक चित्र

गुजरात दंगा 2002 –

यह दंगे साबरमती ट्रैन के S-6 कोच के अंदर भीषण आग लगी थी .जिससे कोच में मौजूद यात्री इसकी चपेट में आ गए ,इसमे ज्यादातर कार सेवक थे .इसमें लगभग 59 लोग आग में जलकर मर गए .इस घटना ने एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया, दंगे की मुख्य कारण बना कारसेवकों के शवों को खुले ट्रक में अहमदाबाद लाना ,जिसके बाद एक बहुत बड़ी तादात में लूटपाट हुई तथा सैंकड़ों की जान चली गई .

मुजफ्फरनगर दंगा 2013-

27 अगस्त 2013 में जानसाठ कोतवाली क्षेत्र के गांव कवाल में दोहरा हत्याकांड हुआ .जिसके बाद दंगे भड़क उठे थे . इसमे लगभग 62 लोगों की जान गई थी और 40 हजार से अधिक लोग बेघर हो गए थे .

सहारनपुर दंगा 2014 –

25 जुलाई 2014 को यूपी सहारनपुर में दो समुदाओं के बीच जमीन विवाद को लेकर दंगा भड़क उठा ,इस दंगे में 3 लोगों की जान गई थी .

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