Gotabaya Rajapaksa biography in hindi, गोटाबाया राजपक्षे का जीवन परिचय .

                         Gotabaya Rajapaksa.

 नाम- नंदसेना गोटाबाया राजपक्षे .

जन्म – 20 जून 1949 .

उम्र- 70 वर्ष .

पिता- डी ए .राजपक्षे .

माता – दैनंदिना राजपक्षे .

भाई – महिंदा राजपक्षे,बेसिल राजपक्षे ,चामल राजपक्षे .

बच्चे- मनोज .

सर्विस- श्री लंका सेना में.

सर्विस काल -1971 से 1992 तक .

 पुरस्कार – रना विक्रम पदक्कमा,राना सूर्य पदक्कमा.

वर्तमान – श्री लंका राष्ट्रपति .

 प्रारंभिक जीवन –

गोटबाया ने कोलोंबो के आनंदा कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे 1971 में श्री लंका सेना में भर्ती हो गए .
इसी दौरान श्री लंका के तीन वर्तमान राष्ट्रपति जेआर जयवर्धने ,रणसिंघे  प्रेमदास,और डीबी विजेतुंगा से वीरता पुरस्कार प्राप्त किए .
 सेवानिवृत्त होने के बाद 1992 में गोटबाया ने कोलंबो विश्वविद्यालय से सूचना प्रौधोगिकी में परस्नातक की डिग्री हासिल की ,वर्ष 1998 में अमेरिकी सूचना प्रौधोगिकी पेशेवर के तौर पर लॉस एंजिलिस स्थित लोपला लॉ स्कूल में काम किया ,इसके बाद गोटबाया 2005 में भाई महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में मदद करने के लिए स्वदेश लौटे तथा श्री लंका और अमेरिका की दोहरी नागरिकता ली .
गोटबाया देश के सबसे ताकतवर राजघराने से ताल्लुक रखते हैं उनके पिता सांसद और कैबिनेट मंत्री रहे हैं .गोटबाया बहुसंख्या सिंहला समुदाय से आते हैं .

उपलब्धि –

गोटबाया ने राक्षा मंत्री के तौर पर तीन दशकों तक चले ग्रहयुद्ध में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल एलम (लिट्टे) का सफलतापूर्वक दमन करने में अहम भूमिका निभाई .
गोटबाया राजपक्षे श्रीलंका की राजनीति में एक दशक से ज्यादा अपना वर्चस्व कायम रखने वाले राजपक्षे बंधुओं में एक हैं जब महिदा राजपक्षे 2005 से 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे तो उस समय गोटाबाया रक्षा के पद पर रहें थे .
गोटबाया और महिंदा राजपक्षे की जोड़ी को ही हिंदू तमिल अल्पसंख्यो और सिंहल बौद्धों के बीच चले ग्रहयुद्ध को खत्म करने का श्रेय दिया जाता है .
यह ग्रहयुद्ध लगभग 26 सालों तक चला था और एक अनुमान के अनुसार एक लाख लोगों ने इसमें अपनी जान गवांई .

आरोप –

बोद्ध बहुसंख्यकों और तमिल अलगाववादियों के बीच दशकों तक चले ग्रहयुद्ध के दौरान कई तमिलों के रिश्तेदार मारे गए या लापता हो गए थे.उस समय रक्षा मंत्री रहे गोटबाया पर युद्ध अपराध के गंभीर आरोप लगे थे. चाहे वो कारोबरी हो,पत्रकार , एक्टिविस्ट जो भी राजपक्षे सरकार के विरोध के लिए खडे हुए उन लोगों को उठा लिया गया और फिर वो कभी दिखाई नही दिए .
उन पर अगस्त 2016 में सरकारी हथियारों की हेरा-फेरी को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप भी लग चुके हैं 

हालांकि राजपक्षे ने इन मामलों में किसी भी तरह की संलिप्ता के आरोपों से साफ इंकार किया .

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