स्वामी विवेकानंद :- महत्वपूर्ण तथा छिपे तथ्य , Swami vivekananda important and hidden facts.

नाम – नरेंद्रनाथ दत्त ( स्वामी विवेकानंद) .
जन्म – 8 जनवरी 1863 .
स्थान – कोलकाता .
पिता – विश्वनाथ दत्त .
माता – भुवनेश्वरी देवी .
गुरु – रामकृष्ण परमहंस.

कोलकाता के कुलीन बंगाली कायस्थ परिवार में जन्मे स्वामी विवेकानंद आध्यात्मिकता की ओर झुके हुए थे . गुरु रामकृष्ण देव से प्रभावित थे . रारकृष्ण परमहंस की  मृत्यु के बाद स्वामी विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का  भ्रमण किया , विश्व धर्म संसद में भारत का प्रतिनिधित्व करने सयुक्त राज्य अमेरिका ,इंग्लैंड और यूरोप में हिन्दू दर्शन के सिद्धान्तों का प्रसार किया, इनके जन्म दिन को  ” राष्ट्रीय युवा दिवस ” के रुप में मनाया जाता है.

शिकागों में स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक भाषण –

 “मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मो और सभी देशों के लोगों को अपने यहां शरण दी ” ये उस भाषण का कुछ अंश है जो 1893 में अमेरिका के शिकागों धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिया गया था .उनके इस भाषण ने पूरी दुनिया के सामने भारत की एक मजबूत छवि पेश की थी .
12 जनवरी 1863 में कोलकाता में जन्मे नरेन्द्रनाथ ही आगे चलकर स्वामी विवेकानंद बने.

स्वामी विवेकानंद से जुडी महत्वपूर्ण बातें –

स्वामी विवेकानंद का जन्म कोलकाता के कायस्थ परिवार में हुआ था उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था . उनके पिता विश्वनाथ दत्त कोलकाता हाईकोर्ट में वकील थे . उनकी मां  भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों वाली महिला थी , उनके दादाजी दुर्गाचरण दत्त संस्कृत और फारसी के  विद्वान थे . उन्होंने महज 25 वर्ष की आयु में अपना घर छोड़ दिया था और वो साधु बन गए थे.
स्वामी विवेकानंद आठ साल की उम्र में स्कूल गए थे 1879 में उन्होंने जनरल असेंबली  इंस्टिट्यूशन से  पश्चिमी तर्क , पश्चिमी दर्शन और यूरोपीय इतिहास का अध्यन किया . 
उन्होंने कम उम्र में ही वेद दर्शन शास्त्र का ज्ञान हासिल कर लिया था . 
स्वामी विवेकानंद ने अपने कॉलेज प्रिंसिपल विलियम हेस्टी से  रामकृष्ण परमहंस के बारे में सुना था जिसके बाद नवंबर 1881 में वो उनसे मिलने के लिए  दक्षिणेश्वर के काली मंदिर पहुंचे थे.
स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस से एक सवाल पूछा हालांकि उन्होंने जो सवाल किया वो उनसे पहले भी कई लोगों से वही बात पूछ चुके थे . उन्होंने पूछा क्या आपने भगवान को देखा है .  राम कृष्णा परमहंस ने जवाब दिया हां मैने देखा है मैं भगवान को उतना ही साफ देख रहा हूं जितना कि तुम्हें देख सकता हूं फर्क सिर्फ इतना है कि मैं उन्हें तुमसे ज्यादा गहराई से महसूस कर सकता हूं .
परमहंस के जवाब से स्वामी विवेकानंद सहमत नहीं थे उन दोनों में खूब तर्क वितर्क हुए. इसके बाद उन्हें जवाब मिला की सत्य को सभी तरह से देखना चाहिए. परमहंस ने उन्हें शिक्षा दी कि सेवा कभी दान नहीं बल्कि सारी मानवता में निहित ईश्वर की सचेतन आराधना होनी चाहिए ,यही उपदेश  ” स्वामी विवेकानंद के जीवन का उपदेश बन गए” 25 वर्ष की आयु में उन्होंने गेरुए रंग के वस्त्र धारण कर लिए थे . उन्होंने गुरु से प्रेरित होने के बाद ही उन्होंने लांलारिक मोह त्याग दिया और  सन्यासी जीवन जीने लगे .

रामकृष्ण परमहंस का निधन – 

1886 , 16 अगस्त को परमहंस का निधन हो जाने के बादस्वामी विवेकानंद दो साल बाद भारत भ्रमण के लिए निकल गए थे. इस दौरान वो देश में फैली गरीबी , पिछड़ेपन को देखकर बहुत उदास.  हुए थे . स्वामी विवेकानंद ने इसके बाद छह साल तक देश की समसवाओं के बारे में विचार किया कहा जाता है कि यात्रा के अंत में ही स्वामी विवेकानंद को ज्ञात हुआ कि शिक्षा के प्रचार प्रसार से ही नए भारत का निर्माण हो सकता है .

शिक्षा के बारे में स्वामी विवेकानंद के विचार –

  • देश की वर्तमान व भविष्य में आने वाली परिस्थितियोंं को ध्यान में रखते हुये हमें अपनी वर्तमान शिक्षा प्रणाली में महत्पूर्ण परिवर्तन करने की अति आवश्यकता है . हमेंं ऐसी वर्तमान शिक्षा की आवश्यकता हो जो समय के अनुकूल हो , हमारी दुर्दशा का मूल कारण  नकारात्मक शिक्षा प्रणाली है .
  • स्वामी विवेकानंद का मानना था कि शिक्षा ऐसी हो जिसमे बालक का शरीरिक ,मानसिक एव आत्मिक विकास हो सके .
  • स्वामी विवेकानंद के अनुसार शिक्षा ऐसी हो जिसमे बालक के चरित्र का निर्माण , मन का विकास ,  बुद्धि का विकास हो सके .
  • स्वामी विवेकानंद का मानना था कि बालक एंव बालिकाओं को समान शिक्षा देनी चाहिए.
  • स्वामी विवेकानंद के अनुसार धार्मिक शिक्षा , किताबों  द्वारा ना देकर आचरण एंव संस्कारोंं  द्वारा देनी चाहिए.

स्वामी विवेकानंद को दमा और शुगर की बीमारी थी उन्होंने एक बार कहा था कि ये बीमारियां मुझे 40 साल पार नहीं करने देंगी . उनकी यह बात सच साबित हुई और 4 जुलाई 1902 को महज 39 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया.

स्वामी विवेकानंद के छिपे हुए तथ्य –

  1. स्वामी विवेकानंद अपनी  बुद्धि के लिए जाने जाते थे , लेकिन उन्होंने बैचलर ऑफ आर्टस की परीक्षा में केवल 56% अंक हासिल किए थे .
  2. स्वामी विवेकानंद चाय के विशेषज्ञ थे . उन दिनों में जब हिंदू पंडित चाय पीने का विरोध करते थे , उस समय उन्होंने अपने मठ में चाय पेश की .
  3.  रामकृष्ण परमहंस , स्वामी विवेकानंद के गुरु थे . अपने शिक्षक के साथ सीखने के शुरुआती दिनों के दौरान स्वामी विवेकानंद ने कभी भी उन पर पूरी तरह भरोसा नही किया. वह  रामकृष्ण परमहंस की हर बात को परखते थे , जब तक उन्हें जवाब नहीं मिल गए.
  4. स्वामी विवेकानंद की बहन जोगेंद्रबाला ने आत्म हत्या कर ली थी .
  5. प्रसिद्ध बंगाली लेखक शंकर की किताब  ‘ द मांक ऐज मैन ‘ के अनुसार स्वामी विवेकानंद को  ” 31 बीमारियों ” का सामना करना पड़ा , यह किताब अनिंद्र, यकृत, और गुर्दे की बीमारी , मलेरिया , मायग्रेन , मधुमेह ,और  हृदय रोगों को सूचीबर्द्ध करती हैं क्योंंकि स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन के दौरान 31 स्वास्थ्य समस्याओंं  का सामना किया. यहां तक की उन्हें अस्थमा भी हुआ जो  कई बार असहनीय हो गया .
  6. हालांकि स्वामी विवेकानंद महिलाओं का सम्मान करते थे और उनकी पूजा करते थे, लेकिन उनके मठ में महिलाओं का प्रवेश सख्त वर्जित था . एक बार जब स्वामी विवेकानंद बीमार थे तो उनके   शिष्य उनकी मां को ले आए . अपनी मां को देखकर वह चिल्लाये  की ” आपने एक महिला को अंदर आने की अनुमति क़्यो दी ” मैं ही वह था जिसने यह नियम बनाया था मेरे लिए ही इस नियम को तोड़ा जा रहा है .
  7. उनके पिता की मृत्यु के बाद उनके परिवार को एक एक दिन का भोजन प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ा , स्वामी विवेकानंद अक्सर घर से बाहर निकलते थे ताकि अन्य परिवार के सदस्यों के पास पर्याप्त भोजन मिल सके . आपके चाचा तारकनाथ के निधन के बाद ,उनकी पत्नी ज्ञानदांसुंदरी ने स्वामी विवेकानंद के परिवार को उनके पैतृक घर से बेदखल कर दिया और अदालत में मुकदमा दायर किया. स्वामी विवेकानंद ने मुकदमे को 14 साल तक लड़ा और 28 जून 1902 को अपने जीवन के अंतिम शनिवार को उन्होंने कुछ वित्तीय मुआवजे का भुगतान करने के बाद अदालत के मामले को समाप्त करने का फैसला किया.
  8. स्वामी विवेकानंद  पुस्तकालय से पुस्तकें उधार लेते थे और अगले दिन उसे वापस कर देते थे . लाइब्रेरियन को संदेह था कि क्या वह वास्तव में मेंं किताबें पढ़ते है या नही , तो  पुस्तकालय अध्यक्ष ने पुस्तकों के पृष्ठ से प्रश्न पूछकर उनका परीक्षण किया. स्वामी विवेकानंद ने उन्हें सही उत्तर दिया और उसी पृष्ठ से  पंक्तियां भी उध्दृत की .
  9. स्वामी विवेकानंद की अथक सेवा ने उनके शरीर को क्षीण कर दिया . वे हमेशा अपने  शिष्यों से कहते थे  ” मेरे अनुभवों से सीखों ”  अपने शरीर पर इतना कठोर मत होना और अपने स्वस्थ्य को खराब मत करना . मैंने मेरा नुकसान किया है .मैंने इसे गंम्भीर रुप से प्रताड़ित किया है और इसका परिणाम किया हुआ , मैंने मेरे जीवन के  सर्वश्रेष्ठ वर्षो के दौरान मेरा शरीर बर्बाद हो गया और मैं अभी भी इसके लिए भुगत रहा हूँ.
  10. स्वामी विवेकानंद ने  भविष्यवाणी की थी कि वह 40 साल से अधिक नही रहेंंगे . 4 जुलाई  1902 को 39 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया .

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