महान भौतिकी वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का जीवन परिचय ..

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की गिनती आइंस्टीन के बाद सबसे बड़े भौतिकशास्त्रियों में होती है . उनकी बुद्धिमता और हास्य के साथ उनके साहस और दृढ़ प्रतिज्ञा ने पूरी दुनिया में लोगों को प्रेरित किया . स्टीफन हॉकिंग का जीवन शुरू से ही कठिनाइयों से भरा हुआ था, लेकिन फिर भी उन्होंने वैज्ञानिक बनने के अपने सपने को पूरा किया और विज्ञान के क्षेत्र में अपना अनगिनत योगदान दिया.

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी –

नाम      –    स्टीफन विलियम हॉकिंग .

जन्म     –    8 जनवरी , 1942 .

स्थान    –    कैम्ब्रिज, इंग्लैंड .

पिता     –     फ्रेंक हॉकिंग .

माता     –    इसोबेल हॉकिंग .

पत्नी    –    जेन वाइल्ड (1965- 1995), ऐलेन मेसन (1995-2016) .

बच्चे    –     तीन .

IQ लेवल –   160 . 

मृत्तु    –    14 मार्च 2018 .

स्टीफन हॉकिंग का प्रारंभिक जीवन –

स्टीफन हॉकिंग का जन्म 8 फरवरी 1942 को ऑक्सफोर्ड में फ्रैंक और इसाबेल ऐलेन के घर हुआ था . 
स्टीफन की मां का जन्म ग्लासगो , स्कॉटलैंड में डॉक्टरों के परिवार में हुआ था . स्टीफन के पिता फ्रैंक ने आर्युविज्ञान और माता इसाबेल ने दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र और राजनीति में शिक्षा प्राप्त की .दोनों की शिक्षा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हुई .
वे दोनों द्वितीय विश्व युद्ध के आरम्भ होने के तुरंत बाद एक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में मिले जहां इसाबेल सचिव के रूप में कार्यरत थी और फ्रैंक चिकित्सा अनुसंधानकर्ता के रूप में कार्यरत थे  ।उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी . द्वितीय विश्व युद्ध का समय आजीविका अर्जित करने के लिए काफी चुनौती पूर्ण था इसलिए एक सुरक्षित स्थान की तलाश मे उनका परिवार ऑक्सफोर्ड आ गया .
अनुसंधान संस्थान में कार्य के दौरान ही फ्रैंक और इसाबेल ने शादी कर ली थी और उनके कुल चार बच्चे थे . फिलिया , मैरी ,स्टीफन और एडवर्ड .एडवर्ड को उन्होंने गोद लिया हुआ था .

स्टीफन हॉकिंग का प्रारम्भिक जीवन व शिक्षा –

स्टीफन हॉकिंग जब आठ साल के थे तब उनके परिवार वाले सेंट अल्बान में आकर रहने लगे और यहां के ही एक स्कूल में स्टीफन का दाखिला करवा दिया गया. वे शुरु में अपनी कक्षा में औसत अंक पाने वाले छात्र थे . किंतु उन्हें बोर्ड गेम खेलना पसंद था . उन्हें गणित में बहुत दिलचस्पी थी .अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद स्टीफन ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. 
स्टीफन हॉकिंग गणित का अध्ययन करना चाहते थे लेकिन  विश्वविद्यालय कॉलेज में गणित उपलब्ध नहीं था इसलिए उन्होंने भौतिकी अपनाई .जिस वक्त इन्होंने इस विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था, उस वक्त इन की आयु महज 17 साल की थी .
स्टीफन हॉकिंग एक मेधावी छात्र बन चुके थे, इसलिए स्कूल और कॉलेज में अव्वल आते रहें .तीन सालों में ही उन्हें प्रकृति विज्ञान में प्रथम श्रेणी की ऑनर्स की डिग्री मिली . जो कि उनके पिता के लिए किसी ख्बाब के पूरा होने से कम नही था . भौतिकी विषय में प्रथम श्रेणी में डिग्री हासिल करने के बाद इन्होंने कैम्ब्रिज  विश्वविद्यालय से अपनी आगे की पढ़ाई की .
साल 1962 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में डिपार्टमेंट ऑफ़ एप्लाइड मैथेमैटिकल्स एंड थ्योरिटिकल फिजिकल ( डीएएमटीपी ) में इन्होंने ब्रह्मांड विज्ञान पर अनुसंधान किया . इसी विषय में उन्होंने पी.एच.डी भी की .
अपनी पी.एच.डी करने के बाद जॉनविले और क्यूस कॉलेज के पहले  रिसर्च फैलो और फिर बाद में प्रोफेशनल फैलो बने . यह उनके लिए बहुत बडी उपलब्धि थी .

स्टीफन हॉकिंग को न्यूरॉन मोर्टार डीसीस का अटैक –

स्टीफन हॉकिंग आम लोगों के जैसे ही अपना जीवन जी रहें थे .जब वो 21 साल के थे तो एक बार छुट्टीया मनाने के लिए अपने घर आए हुए थे , वो सीढी से उतर रहे थे की तभी उन्हें बेहोशी कि एहसास हुआ और वो नीचे गिर पड़े . लेकिन साल 1963 में इनकी सेहत खराब होने लगी . 21 वर्ष के स्टीफन की बिगड़ती हालत देख उनके पिता उन्हें अस्पताल ले गए, जहां पर उनकी जांच की गई और जांच में पाया कि स्टीफन को न्यूरॉन मोर्टार डीसीस नामक लाइलाज बीमारी है . इस.बीमारी में दिमाग और आंखे छोड़कर शरीर का कोई भी अंग काम नही करता है . इस बीमारी के कारण शरीर के हिस्से धीरे- धीर कार्य करना बंद कर देते हैंं .और इस बीमारी का कोई इलाज भी नही है . डॉक्टर्स ने कहा स्टीफन हॉकिंग बस 2 साल के मेहमान है लेकिन स्टीफन ने अपनी इच्छा शक्ति पर पूरी तरह से पकड़ बना ली थी और उन्होंने डॉक्टरों से कहां मैं 2 नही 20 नही पूरे 50 सालों तक जियूंगा .
उस समय सबने उन्हें दिलासा देने के लिए हां मे हां मिला दी थी , पर आज दुनिया जानती है की स्टीफन हॉकिंग ने जो कहा वो कर के दिखा दिया.  जिस वक्त स्टीफन को इस बीमारी का पता चला था उस वक्त वो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई कर रहें थे . उन्होंने अपनी इस बीमारी को अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया .बीमार होने के बावजूद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को पूरा किया और साल 1965 में उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की .पीएचडी में इनके थीसिस का शीर्षक “प्रॉपर्टीज ऑफ़ एक्सपांडिंग यूनिवर्स ” था .

जनवरी 1965 स्टीफन हॉकिंग की शादी –

अपनी इसी बीमारी के बीच में ही उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी की और और बुरे वक्त में साथ देने वाली अपनी प्रेमिका जेन वाइल्ड से 1965 में शादी कर ली .जेन और स्टीफन हॉकिंग के कुल तीन बच्चे थे जिनके नाम  रॉबर्ट ,लुसी और तीमुथियम है .
तब तक स्टीफन हॉकिंग का पूरा दाहिना हिस्सा खराब हो चुका था वो stick के सहारे चलते थे . अब स्टीफन हॉकिंग ने अपने वैज्ञानिक जीवन का सफर शुरु किया और धीरे धीरे उनकी ख्याति पूरी दुनिया में फैलने लगी .
स्टीफन की ये शादी 30 सालों तक चली थी और साल 1995 में जेन और स्टीफन ने तलाक ले लिया था . तलाक लेने के बाद स्टीफन हॉकिंग ने ऐलेन मेसन से विवाह कर लिया था और साल 1995 में हुई ये शादी साल 2016 तक चली थी .
रोग से पीडि़त होने के बावजूद भी वो किसी का सहारा नही लेते थे .और अपने दैनिक कामों को निरंतर जारी रखा .1974 में डॉक्टरेट की उपाधि मिलने के बाद आपेक्षिता का सिद्धान्त और पुंज सिद्धान्त पर काम करना शुरू कर दिया स्टीफन वर्ष 1974 में ब्लैक होल के रहस्य के बारे में बताया था बाद में इस थ्योरी को स्टीफन रेडिएशन के नाम से पहचाना गया .
स्टीफन को साल 1974 में रॉयल सोसायटी (फैलोशिया)में शामिल किया गया. जिसके बाद इन्होंने साल 1975 में डीएएमटीपी में बतौर गुरुत्वाकर्षण भौतिकी रीडर के तौर पर कार्य किया और साल 1977 में गुरुत्वाकर्षण भौतिकी के प्रोफेसर के रुप में भी यहां अपनी सेवाएं दी . वही इनके कार्य को देखते हुए साल 1979 में इन्हें कैम्ब्रिज में गणित के लुकासियन प्रोफेसर नियुक्त किया गया था . जो दुनिया में सबसे प्रसिद्ध अकादमी पद है .उनके द्वारा लिखित पुस्तक ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम उस समय की सबसे ज्यादा समय तक बिकने वाली पुस्तक बनी ,.उस समय वह किताब लगभग 237 हफ़्तों तक चली .
प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने किसी भी एलियन सभ्यता खासकर वैसी सभ्यता जो तकनीकी रूप से इंसानों से अधिक उन्नत हो ,वहां हमारी हमारी मौजूदगी की घोषणा को लेकर आगाह किया है .

स्टीफन हॉकिंग की उपलब्धियांं –

(1) स्टीफन ने क़्वांंटम ग्रेविटी और ब्रह्मांड विज्ञान के अध्ययन के अलावा ” ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम ” नाम की किताब भी लिखी जो बेस्टसेलर रही .
(2) स्टीफन हॉकिंग ने ब्लैक होल के रहस्य के बारे में बताया था . वे वर्ष 1974 में इस थ्योरी को लेकर आए थे .बाद मेंं इस थ्योरी को  हॉकिंग रेडिएशन के नाम से पहचाना गया .

 प्रतीकात्मक चित्र
(3) स्टीफन हॉकिंग को उनके कामों के लिए1979 में अल्बर्ट आइंस्टीन मेडल , 1982 में द ऑर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर और 1988 में भौतिक विज्ञान में वॉल्फ प्रीइज से सम्मानित किया गया .
(4) स्टीफन हॉकिंग1974 में ब्रिटेन की रॉयल सोसायटी के सबसे कम उम्र के सदस्य बनाए गए थे .
(5) स्टीफन हॉकिंग ने मानवजाति के लिए चेतावनी जारी की थी उन्होंने कहा था कि अपने आप को बचाए रखने के लिए सभी मानव 100 साल के अंदर पृथ्वी को छोड़कर अन्य किसी ग्रह पर चले जाए .

स्टीफन हॉकिंग के विचार –

  • मैने देखा है वो लोग भी जो कहते हैं कि सब कुछ पहले से तय है , और हम उसे बदलने के लिए कुछ नहीं कर सकते, वे भी सड़क पार करने से पहले देखते है .
  • यादि आप हमेशा गुस्सा या शिकायत करते हैं.तो लोगों के पास आपके लिए समय नही रहेगा .
  • अतीत , भविष्य की तरह ही अनिश्चित है और केवल संभावनाओंं के एक स्पेक्ट्रम के रुप में मौजूद है .
  • चाहे जिंदगी जितनी भी कठिन हो , आप हमेशा कुछ ना कुछ कर सकते हैं और सफल हो सकते है .
  • अज्ञानता दुश्मन नहींं है जबकि दुश्मन वो भ्र्म है जो ये कहे कि आपको सब कुछ आता है .

” मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैने  ब्रह्मांड को समझने में अपनी भूमिका निभाई . इसके  रहस्य लोगों के सामने खोले और इस पर किये गये शोध में अपना योगदान दे पाया ” .

” मुझे हमेशा यह गर्व रहेगा कि मैने ब्रह्मांड को जानने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विज्ञान के क्षेत्र में कई नई खोजे की और लोग मेरे इसी योगदान की प्रसंशा करते है ” .

” शरीर की सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए , अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कंप्यूटर से जोड़कर ही बातचीत कर पाता हूं .

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