The most dangerous”Tribe ” in the world . दुनिया की खूंखार और खतरनाक जनजातियां .

दुनिया के अलग -अलग हिस्सों में कई खूंखार और खतरनाक जनजातियं निवास करती हैं . कुछ जनजातियां तो ऐसी हैं जो हजारों सालों से निवास करती आ रही हैं . इन खतरनाक जनजातियों का बाहरी दुनिया से कुछ लेना देना नही होता है . इन जनजातियों के अपने रीति रिवाज है. सिर्फ जंगलों में गुजारा करते हैं वे एक खानाबदोश लोग हैं जो मछली और अन्य चीजों को समुद्र से खाने के लिए भाले और जाल पर भरोसा करते हैं.

(1) मुर्सी जनजाति .

मुर्सी जनजाति के लोग साउथ इथियोपिया और सूडान बॉर्डर के ओमान वैली में रहते हैं .

मुर्सी जनजाति को बेहद खतरनाक माना जाता है. सरकारी आंकडों के अनुसार मुर्सी जनजाति के लोगों की कुल जनसंख्या लगभग 10000 हजार के आसपास है . ये बाहरी दुनिया से बहुत दूर रहते हैं और इन्होंने सैकड़ोंं लोगों को मार डाला है . जो भी इनकी अनुमति के बिना इनके समुदाय में आए थे. 

मुर्सी जनजाति के लोग अपनी परंपराओंं को लेकर भी चर्चा में रहते हैं . लोगों की बुरी नजर से बचने के लिए मुर्सी जनजाति की महिलाएं अपने निचले होंठ में लकड़ी या मिट्टी की बनी डिस्क पहनती है . मुर्सी जनजाति को एक चीज और अधिक पृथक और खतरनाक बनाती है . ये लोग आज की अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार जीते है लेकिन इनके पास सुरक्षा के बहुत सारे आधुनिक हथियार है . बताया यह भी जाता है कि इनके पास एके -47 तक पाई जाती हैं .

मुर्सी जनजाति की महिलाओं द्वारा होठ पर डिस्क लगाने के पीछे वजह मानी जाती है कि वह लड़कियों को गुलामों द्वारा खरीदने बेचने वाले व्यापारी या पर्यटकोंं से बचाना है जिस कारण उनकी सुंदरता कम हो जाती है . 

2012 में कुछ लोगों द्वारा उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी जो विफल रही और लगभग 12 लोगों ने अपनी जान गंवा दी जो मार्गदर्शक थे . इस घटना के बाद सरकार ने मुर्सी जनजाति से संपर्क करने पर प्रतिबंध लगा दिया था .

(2) लॉस्ट ट्राइब जनजाति .

इस जनजाति में जो कोई भी घूमने और जाने की कोशिश की है उसे इस जनजाति ने जिंदा नहीं छोड़ है इसी वजह से आज तक इनकी कोई साफ और सही फोटो उपलब्ध नही हो सकी है .

ये अपने क्षेत्र में किसी भी आम इंसान को कदम नही रखने देते है .यह जनजाति हिन्द महासागर के एक छोटे से आइलैंड नॉर्थ सेंटिनल पर रहती है . यह आइलैंड भारत के जलीय क्षेत्र में स्थित है यह आइलैंड बेहद खतरनाक है .

2006 में यहां की जनजातियों ने कई मछुआरों को मार डाला था . इससे पहले भी कई बार ये हिंसा कर चुके है .

(3) सेंटिनेलिस जनजाति .

भारत के अंडमान – निकोबार  दीप समूह में मौजूद उत्तरी सेंटिनल द्वीप , दुनिया के लिए आज भी एक रहस्य है. इसे दुनिया के सबसे खतरनाक टापू में गिना जाता है . यह इतना खतरनाक है कि भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर रखा है .

इस जनजाति के बारे में तो अभी तक आप समझ ही गए होंगे कि ये कितनी खतरनाक है और इसके पास बाहरी लोग नही जा सकते हैं .

सुनामी के वक्त भारतीय कोस्ट गार्डस ने इस आबादी के पास खाने के पैकेट भेजने की कोशिश की थी . लेकिन यहां मौजूद आदिवासियों ने उड़ते हुए हेलीकॉप्टर पर भालो और तीरों से हमला कर दिया था .

सेंटिनलीस अब दुनिया की उन गिनी चुनी जनजातियों में से एक है जिन्हें बाहरी दुनिया से कोई मतलब नहीं है और जो असल में काफी खतरनाक है .

(4) मोकेन जनजाति , (सबसे खूंखार और खतरनाक ) .

दुनिया की सबसे खूंखार और खतरनाक जनजाति ” मोकेन जनजाति ” को ही माना जाता है .

मोकेन जनजाति 800 द्वीपों के तट पर लकड़ी की नावों में रहने वाले, अपने जीवन का अधिकांश समय नावों पर बिताती है . यह एक विवादित क्षेत्र है वर्मा और थाईलैंड के बीच स्थित इस क्षेत्र पर दोनों देश अपना – अपना दावा करते हैं .

आमतौर पर जनजातियां भूमि से जुड़ी होती है और मोकेन लोग समुद्र में अपनी नावों के बाहर रहती है इनकी आबादी लगभग 3000 है इनकी नावों में आमतौर पर एक रसोई घर , बैठक और बेडरुम होते हैं. मोकेन जनजाति जनजाति में एक दिलचस्प आनुवंशिक लाभ यह है कि उनके बच्चे पानी के भीतर बेहतर तरीके से देख सकते है .

शोधकर्ताओंं ने इस असामान्य घटना की कुछ विशेषताओं का पता लगाया . तब यह पता चला कि पूरी चीज आंख के लेंस में है .मोकेन जनजाति के बच्चोंं के अलावा ऐसी क्षमता केवल डॉल्फिन और सील के पास है .

(5) जारवा जनजाति .

जारवा जनजाति को दुनिया की सबसे पुरानी जनजाति माना जाता है जो अभी भी पाषाण युग मेंं जी रहें हैं

जारवा जनजाति अब विलुप्त होने की कगार पर है इस जाति के सदस्यों की संख्या लगभग 400 के आसपास है . हिंद महासागर के टापुओं पर पिछले 55,000 वर्षो से निवास कर रही है .

जारवा जनजाति के लोगों के मूल ओरिजिन अफ्रीका महाद्वीप माना जाता है . और यह यहां अफ्रीका से आकर बसे है . 

इस जानजाति के लोग अब भी हजारों साल पहले की तरह ही रहते हैं .अब भी अपने लिए तीर – धनुष से शिकार करते हे . और केवल शिकार पर निर्भर रहते हैं .

जारवा जनजाति के स्त्री पुरुष आमतौर पर नग्न रहते है . कुछ आभूषण ,शरीर के निचले हिस्से पर पत्ते या कपड़े के छोटे टुकड़े पहनते है जिन्हें पहनने का मकसद नग्नता छिपाना नही होता है  . ये लोग विवाह  किशोरावस्था में ही कर लेते हैं 

जारवा जनजाति के लोग रंग के गहरे काले और कद में छोटे होते है . बच्चे का रंग थोड़ा भी गोरा हो तो वे मानते है कि बच्चा दूसरे समुदाय का है , और बच्चे की हत्या कर देते है .जिसके लिए समुदाय में कोई दंड नही है .

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