जीवन को सरल और शांत बनाने की चाणक्य शिक्षा .

चाणक्य द्वारा रजनीति और व्यवहारिक जीवन पर बहुत ही ज्ञानवर्धक उपदेश दिया गये हैं . चाणक्य के पास ज्ञान का भंडार था .उनकी राजनीतिक समझ और चतुर बुद्धि से चंद्रगुप्त छोटे से राज्य से भारत के विशाल भू भाग के राजा बने . चाणक्य की शिक्षा का अनुपालन करके जीवन को  निश्चय ही सरल ,शांत और धनवान बनाया जा सकता है .

चाणक्य के विचार मनुष्य जीवन के बारे में –

  • व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले ही मर जाता है . और वे अपने अच्छे और बुरे कर्मों के फल के आधार पर ही अकेले ही स्वर्ग या नर्क जाता है .
  • व्यक्ति को जैसा भी खाना मिलेंं , खुशी -खुशी खा लेना चाहिए. कभी भी किसी खाने की बुराई नही करनी चाहिए और थाली में खाना नहीं बचाना चाहिए .
  • व्यक्ति को भूतकाल के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए .विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीता है .
  • फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती हैं लेकिन एक व्यक्ति की अच्छाई सूर्य की रोशनी की तरह हर दिशा में फैलती है .

 धन संपदा के बारे में चाणक्य के विचार –

  • जिस प्रकार किसी तालाब और किसी बर्तन में भरे जल का सही समय पर इस्तेमाल ना किया जाए तो वह सड़ जाता है , ठीक उसी प्रकार धन का सही उपयोग न किया जाए और उसका संग्रहण किया जाए तो वो भी किसी काम का नही रहता .
  • व्यक्ति के पास जितने भी पैसे हो अर्थात जितनी भी उसकी आय है उसको उसी में खुश रहना चाहिए और आय से अधिक खर्च नही करना चाहिए .
  • मनुष्य को दान और जाप कार्यो में कभी भी असंतोष नहीं करना चाहिए . ये कार्य जितना अधिक करेंगे आपके पुण्यों में उतनी ही प्रगति होगी , जहां एक ओर दान करने से दूसरों की मदद होती है पुण्य मिलता है वही दूसरी ओर मंत्रों का जाप करने से आंतरिक शांति मिलती है .

शिक्षा के बारे में चाणक्य के बिचार –

  • वे माता पिता बच्चोंं के शत्रु के समान हैं , जिन्होंने बच्चोंं को अच्छी शिक्षा नहीं दी , क्योंंकि अनपढ़ बालक का विद्वानोंं में उसी तरह अपमान होता है जैसे हंसो के झुंड में बगुले का .
  • मनुष्य को कभी भी पढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि जितना अधिक अध्ययन करेंगे ,उतना ज्यादा आपके ज्ञान में बढ़ोतरी होगी और ज्ञानी व्यक्ति ही जीवन में सुख – शांति से रह सकता है .
  • शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूंछ के जानवर जैसा होता है , इसलिए माता -पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चोंं को ऐसी शिक्षा दें जिससे वे समाज को सुशोभित कर सके .

भागवान के बारे में चाणक्य के विचार –

  • जो लोग परमात्मा से मिलना चाहते हैं उन्हें ,वाणी ,मन , इंद्रियोंं की पवित्रता और एक स्वच्छ ह्रदय की आवश्यकता होती है .
  • इस धरती पर मां ही सबसे बड़ी है . मां से बड़ा ना कोई देवता ,न कोई तीर्थ और न ही गुरु है . जो व्यक्ति अपने माता – पिता की सेवा करता है उसे और किसी भक्ति की आवश्यकता नही होती .
  • जो अल्पमति के लोग है वह मूर्ति में भगवान देखते हैं लेकिन व्यापक दृष्टिकोण रखने वाले लोग अच्छी तरह जानते हैं कि भगवान  सर्वव्यापक है .

बच्चोंं के बारे में चाणक्य के विचार –

  • बच्चोंं के जन्म के पहले पांच साल तक उसका लाड़ – दुलार करें , दस साल का होने तक उसे ताड़ना दे लेकिन सोलह साल पूरी होने पर पुत्र से मित्र की तरह ही व्यवहार करें .
  • चाणक्य के अनुसार अधिक लाड़ प्यार करने से बच्चोंं में अनेक दोष उत्प्न्न हो जाते है इसलिए यदि वे कोई गलत काम करते हैं तो उसे नजर अंदाज करके लाड़ प्यार करना उचित नहीं है ,बच्चोंं को डांटना भी आवश्यक है .

चाणक्य के  महत्वपूर्ण विचार –

  • जब आप किसी काम की शुरुआत करें ,तो असफलता से ना डरे और उस काम को ना छोड़े जो लोग ईमानदारी और मेहनत से काम करते हैं वे हमेशा प्रसन्न रहते हैं .
  • संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है ,संतोष जैसा कोई सुख नहीं है ,लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है .
  • जिस प्रकार चंदन का वृक्ष दुनिया में अपनी भीनी सुंगध और शीतलता के लिए जाना जाता है , लेकिन उसी चंदन के वृक्ष पर संसार के विषैले जीव सांप भी निवास करते हैं उसी तरह बाहर से बहुत मीठा बोलने वाला व्यक्ति आपके लिए मित्र साबित हो जरुरी नहीं है वह आपके लिए शत्रुता का भाव भी रख सकता है .
  • विवाह के बाद व्यक्ति को दूसरी स्रियों पर आकर्षित नहीं होना चाहिए क्योंकि इस वजह से पारिवारिक जीवन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है .

संक्षेप में चाणक्य शिक्षा – 

  1. आलस्य से दूर रहें .
  2. फिजूल खर्ची ना करें .
  3. अपनी कमजोरी किसी को ना बताएं .
  4. चरित्र रक्षा .
  5. दोस्तों का चुनाव सोच समझ कर .
  6. कठिन परिश्रम .

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