नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी का जीवन परिचय .

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी भारतीय मूल के प्रख्यात अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं . अभिजीत बनर्जी का जन्म मुंबई में हुआ था . 2019 के नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी का पूरा नाम अभिजीत विनायक बनर्जी है .इसमें बीच वाला विनायक मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर का लिया हुआ है. उनकी पढ़ाई लिखाई पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में हुई , जबकि उच्च शिक्षा के लिए वे दिल्ली में रहें . उनको यह पुरस्कार वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में किए गए शोध कार्यों के लिए दिया गया .अभिजीत बनर्जी अपनी पत्नी एस्थर डफ्लो के साथ सयुक्त रुप से नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले छठे विवाहित जोड़े है .

अभिजीत बनर्जी का परिचय –

नाम           –  अभिजीत बनर्जी .
जन्म          –  21 फरवरी , 1961 
स्थान         –  मुंबई भारत .
नागरिकता  – अमेरिका 
पिता          – दीपक बनर्जी ,अर्थशास्त्र की प्रोफेसर .
माता          – निर्मला बनर्जी , अर्थशास्त्र के प्रोफेसर .
शिक्षा         – साउथ पॉइन्ट हाई स्कूल ,प्ररम्भिकशिक्षा .
                –   कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंसी कॉलेज ,                       –    अर्थशास्त्र से स्नातक .
                 –    जेएनयू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र से एमए की                    –     डिग्री.
                        हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्र में पीएचडी .
शादी         – अरुंधति तुली बनर्जी , तलाक, समय ज्ञात नहीं .
               – एस्थर डफ्लो ,2015 . 
बच्चे         – पुत्र 2012 में .
सम्मान      – 2019 ,अर्थशास्र नोबेल पुरस्कार विजेता.

प्रारंभिक जीवन व शिक्षा –

अभिजीत बनर्जी का जन्म 21 फरवरी 1961 में मुंबई में हुआ था .लेकिन अभिजीत बनर्जी के माता पिता मूल रूप से पश्चिम बंगाल के कोलकाता के रहने वाले थे . इसलिए अभिजीत बनर्जी का बचपन कोलकाता में ही बीता . अभिजीत ने कोलकाता के साउथ  पॉइन्ट हाई स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की . प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने वर्ष 1981 में  कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंसी कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री हासिल की . अभिजीत की माता निर्मला बनर्जी सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज , कोलकाता में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर थी तथा पिता दीपक बनर्जी , कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख थे .इस तरह देखा जाए तो उनका बैकग्राउंड अर्थशास्त्र ही था , जिसका उन्होंने अपने भविष्य के लिए चुना .

उच्च शिक्षा – 

प्रेसिडेंसी  कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने अपने बैकग्रांउड के अनुसार अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल करने के लिए जवहार लाल नेहरु विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया .
जेएनयू से एमए अर्थशास्त्र की डिग्री प्राप्त करने के बाद 1988 में अमेरिका के हार्वर्ड  विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की .

व्यक्तिगत जीवन –

अभिजीत बनर्जी के साथ अमेरिका एमआईटी में पढ़ने महिला मित्र अरुंधति तुली बनर्जी भी गई थी .  अभिजीत और अरुंधति कोलकाता में भी साथ पढ़े थे . दोनो ही एमआईटी से शिक्षा प्राप्त करने के बाद एमआईटी में ही प्रोफेसर बने और बाद में दोनों ने शादी कर ली .
लेकिन दोनों ने ही परिवारिक कारणों के चलते तलाक ले लिया .अभिजीत बनर्जी और अरुंधति तुली बनर्जी का कहना क बच्चा भी था जिसका असामयिक ही तलाक निधन हो गया .
अरूधंति से अलग होने के बाद अभिजीत एमआईटी की ही एक प्रोफेसर एस्थर डफ्लो के साथ लिव इन में रहने लगे थे . लिव इन के दौरान एस्थर डफ्लो ने 2012 में एक बेटे को जन्म दिया . बेटे के जन्म के तीन साल बाद अभिजीत और डफ्लो ने 2015 में शादी कर ली .

करियर –

अभिजीत बनर्जी अभी एमआईटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं इससे पहले वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय और विंसटन विश्वविद्यालय में भी शिक्षक रह चुके हैं . इन्होंने अपनी पत्नी एस्थर डफ्लो, माइकल क्रेमर, जॉन ए लिस्ट और सेंधिल मुलईनाथन के साथ मिलकर 2003 में उन्होंने एमआईटी में अब्दुल-लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब की शुरुआत की और वह इसके डायरेक्टर बने तथा साथ मिलकर कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है . इन्हें 2004 में अमेरिकन एकेडमी और आर्ट्स एंड सांइसेज का फेलो बनाया गया . 
2013 में मिलेनियम डेवलपमेंट गोल बनाने वाली टीम में शामिल किया था . यह लैब एक वैश्विक शोध केन्द्र है जो गरीबी कम करने की नीतियों पर काम करती है . यह लैब एक नेटवर्क की तरह काम करती है जिससे दुनिया के विश्वविद्यालयों के बहुत से प्रोफेसर जुड़े हुए हैं .

सम्मान –

भारतीय – अमेरिकी मूल के अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी एस्थर डफ्लो और अमेरिकी अर्थशास्त्री माइकल क्रोमर को संयुक्त रूप से 2019 के अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया .अभिजीत बनर्जी को यह सम्मान वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन क्षेत्र में किए गए शोध कार्यों के लिए दिया गया . 
अभिजीत और उनकी पत्नी एस्थर डफ्लो संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार पाने वाले छठे विवाहित जोड़े हैं .

अभिजीत बनर्जी ने तिहाड़ जेल में बिताए 10 दिन –

अभिजीत बनर्जी 1983 में जब जेएनयू से अर्थशास्त्र से एमए कर रहें थे . उस समय जेएनयू छात्रसंघ ने तत्कालीन कुलपति पीएन श्रीवास्तव के खिलाफ हूए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था . दरअसल ,अभिजीत ने छात्रों के साथ मिलकर छात्र संघ के अध्यक्ष को  विश्वविद्यालय कैंपस से निकाले जाने के फैसले का विरोध किया था . जिसके तहत तत्कालीन कुलपति ने छात्रों से अपनी जान को खतरा बताया था . जिसके चलते अभिजीत बनर्जी को अन्य छात्रों के साथ मिलकर 10 दिन तक जेल में रहना पड़ा था बाद में छात्रों को जमानत पर रिहा कर दिया तथा कुछ समय बाद छात्रों पर लगी सभी तरह की धाराएं हटा दी गई .

अभिजीत बनर्जी की कलम से –

” ये 1983 की गर्मियों की बात है हम जेएनयू के छात्रों ने वाइस चांसलर का घेराव किया था .वे उस वक्त हमारे स्टूडेंट यूनियन के  अध्यक्ष को कैंपस से निष्कासित करना चाहते थे . घेराव प्रदर्शन के दौरान देश में कांग्रेस की सरकार थी पुलिस आकर सैकड़ो छात्रों को उठाकर ले गई . हमे दस दिन तक तिहाड़ जेल में रहना पड़ा , पिटाई भी हुई थी .लेकिन तब राजद्रोह जैसा मुकदमा नहीं होता था . हत्या की कोशिश के आरोप लगे थे .दस दिन तक जेल में रहना पड़ा .”

मोदी सरकार की नीतियों के आलोचक –

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी मोदी सरकार की नीतियों के मुखर आलोचक है . मोदी सरकार के सबसे  बड़े आर्थिक फैसले नोटबंदी के ठीक पचास दिन बाद अभिजीत ने न्यूज 18 को दिए अपने साक्षात्कार में कहा था  ” मैं इस फैसले के पीछे का कारण को नही समझ पाया हूं . जैसे कि 2000 रुपये का नोट क़्यो जारी किया गया है .मेरे ख्याल से इस फैसले के चलते जितना बड़ा संकट बताया जा रहा है उससे यह संकट कही ज्यादा बड़ा है .
अभिजीत बनर्जी 108 अर्थशास्त्रीयों के उस पैनल में भी शामिल थे जिन्होंने मोदी सरकार पर देश की जीडीपी के सही आंकडे छुपाने तथा आंकडों में हेराफेरी करने का आरोप लगाया था .

अभिजीत बनर्जी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी –

  • अभिजीत बनर्जी प्रख्यात भारतीय – अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं .
  • अभिजीत बनर्जी पत्नी एस्थर डफ्लो के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार जीतने वाले छठे विवाहित जोड़े हैं .
  • अभिजीत जेएनयू में शिक्षा के दौरान 10 दिन तक तिहाड़ जेल में रह चुके हैं .
  • अभिजीत अर्थशास्त्रीयों की उस पैनल का हिस्सा थे जिसने मोदी सरकार के जीडीपी के आंकडो में हेराफेरी का आरोप लगाया था.
  • मोदी सरकार के सबसे बड़े आर्थिक फैसले नोटबंदी को उन्होंने एक गलत कदम बताया .
  • अभिजीत ने चार किताबें भी लिखी है और उन्होंने दो डॉक्यूमेंट्री फिल्म का निर्देशन भी किया है .
  • अभिजीत वर्तमान में एमआईटी में फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं .
  • अभिजीत बनर्जी सामजिक विज्ञान ( अर्थशास्त्र ) की श्रेणी में इंफोसिस  पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ता हैं .
  • 2012 में उन्हें अपनी किताब पुअर इकोनॉमिक्स के लिए सह-लेखक एस्थर डफ्लो के साथ जेराल्ड लोब अवार्ड मिला था .
  • अभिजीत बनर्जी और एस्थर डफ्लो ने राजस्थान में एक प्रयोग के तहत माओं को अपने बच्चोंं को टीका लगबाने के लिए एक दाल का बैग भेट किया ,जिसके तहत क्षेत्र में प्रतिरक्षण दर बढ़ गई .

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