Raja Ram Mohan Roy Best Quotes: राजा रममोहन रॉय के अनमोल विचार.

 Raja Ram Mohan Roy का जन्म 22 मई 1772 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के राधानगर गांव में हुआ था . राजा राममोहन रॉय बचपन से ही मूर्ति पूजा को त्याग दिया था और हिंदू धर्म में व्यप्त कुरीतियों के खिलाफ आवाज जिसमें सती प्रथा को खत्म करना , पिछड़ों का उत्थान तथा मूर्ति पूजा का वहिष्कार शामिल था . साथ ही उन्होंने भारतीय महिलाओं को पुरुषों के बराबर ही अधिकार दिए जाने के पक्षधर थे.

आइए जानते है भारतीय समाज सुधारक Raja Ram Mohan Roy के विचारों के बारे में.

1- ” ईश्वर केवल एक है , उसका कोई अंत नहींं सभी जीवित वस्तुओं में परमात्मा का अस्तित्व है .”

Raja Ram Mohan Roy.

2- ” मैं हिंदू धर्म का नहीं , इसमें फैली कुरीतियों का विरोधी हूँ .”

Raja Ram Mohan Roy.

3- ” हिंदी में अखिल भारतीय भाषा बनने की क्षमता है .”

Raja Ram Mohan Roy.

4- ” प्रत्येक स्त्री को पुरुषों की तरह अधिकार प्राप्त हो, क्योंंकि स्त्री ही पुरुष की जननी है , हमें हर हाल में स्त्री का सम्मान करना चाहिए.”

Raja Ram Mohan Roy.

5- ” यदि मानव जाति किसी के  द्वारा थोपे गए विचारों पर ध्यान न दे और तर्क से सत्य का अनुसरण करें , तो उसकी उन्नति को कोई रोक नह़ी सकता .”

Raja Ram Mohan Roy.

6- ” धर्म ग्रंथ पढ़ने से जाति  भ्रष्ट होने का प्रश्न ही नहीं उठता .मैंने तो कई बार बाइबिल और कुरानेशरीफ पढ़ा है , मैं न तो ईसाई बना और न ही मुसलमान बना .”

Raja Ram Mohan Roy.

7- ” हमारे समाज के लोग यह समझते हैं कि नदी में नहाने से , पीपल की पूजा करने से और पंडितों को दान देने से हमारे पाप धुल जाएंगे . वे ऐसा करके अंधविश्वास के अंधेरे में भटक रहें हैं.”

Raja Ram Mohan Roy.

8 – ” प्रेस एवं विचारों की अभिव्यक्ति पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नही होना चाहिए .”

Raja Ram Mohan Roy.

9- ” किसी भी कार्य  की सफलता एवं असफलता केवल एक व्यक्ति का नहींं अपितु सम्पूर्ण समाज का उत्तरदायित्व होता है .”

Raja Ram Mohan Roy.

10- ” भारत का सत्य परिचय उसी मनुष्य में मिलता है जिसके ह्रदय में मनुष्य मात्र के लिए सम्मान है , स्वीकृति है .”

Raja Ram Mohan Roy.

11  – ” ब्रह्रा समाज बहुदेववाद तथा मूर्ति पूजा का त्याग करता है .”

Raja Ram Mohan Roy.

12- ” आत्मा अमर और अजर है .”

Raja Ram Mohan Roy.

13- ” पाप कर्म का  प्रायश्चित एव पुनः प्रवृत्तियोंं के त्याग  द्वारा ही मुक्ति संभव है न कि जन्म , जाति के आधार पर .”

Raja Ram Mohan Roy.

14- ” ईश्वर के लिए सभी एक समान है . वह सभी की प्रर्थना समान रूप से स्वीकार करता है .”

Raja Ram Mohan Roy.

15- ” सामाचार पत्रों को पिछड़ी जातियों तक पहुंचाया जाए , ताकि वे ज्ञान के प्रकाश से सराबोर हो सके .”

Raja Ram Mohan Roy.

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धन्यवाद .

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